Supreme Court Latest News : सुप्रीम कोर्ट ब्रेकिंग अब बड़े बच्चों को गोद लेने पर भी मिलेगी छुट्टी, कोर्ट ने कानून को बताया असंवैधानिक

Supreme Court Latest News

Supreme Court Latest News

  • बड़ा बदलाव: कोर्ट ने मातृत्व संरक्षण को ‘मौलिक मानवाधिकार’ घोषित किया।
  • हटी पाबंदी: 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली पुरानी शर्त अब असंवैधानिक।
  • असर: अब बच्चा जन्म देने वाली और गोद लेने वाली माताओं के बीच छुट्टी को लेकर भेदभाव नहीं होगा।

Supreme Court Latest News , नई दिल्ली — भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक गेम-चेंजर फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का अधिकार बच्चे के जन्म के तरीके पर निर्भर नहीं करता। अब बच्चा गोद लेने वाली महिलाएं भी उतनी ही हकदार होंगी, जितनी कि जैविक माताएं। सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता की उस पाबंदी को पूरी तरह खारिज कर दिया, जो केवल 3 महीने से कम उम्र के शिशु को गोद लेने पर ही छुट्टी की अनुमति देती थी।

Chhattisgarh Indefinite Hunger Strike : हौसले के आगे नतमस्तक हुआ मौसम! नवा रायपुर में तबाही के बाद भी अभ्यर्थियों का धरना अटूट

3 महीने वाली शर्त क्यों हुई खारिज?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस कानून को असंवैधानिक करार दिया। कोर्ट का तर्क है कि मातृत्व संरक्षण एक बुनियादी अधिकार है। यदि कोई महिला किसी बड़े बच्चे को गोद लेती है, तो उसे भी बच्चे के साथ बॉन्डिंग बनाने और उसकी देखभाल के लिए समय चाहिए। 3 महीने की उम्र की सीमा तय करना न केवल भेदभावपूर्ण था, बल्कि यह मातृत्व के मूल उद्देश्य के खिलाफ था।

“मातृत्व का आनंद और उसका संरक्षण एक मौलिक मानवाधिकार है। इसे इस आधार पर नहीं छीना जा सकता कि बच्चे का जन्म कैसे हुआ या उसे किस उम्र में अपनाया गया।” — सुप्रीम कोर्ट बेंच

इस फैसले के बाद अब कंपनियों और सरकारी विभागों को अपनी लीव पॉलिसी में बदलाव करना होगा। अब एडॉप्शन लीव (Adoption Leave) के लिए उम्र का बंधन आड़े नहीं आएगा। यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है जो बड़े बच्चों को गोद लेने की योजना बना रही हैं लेकिन नौकरी और छुट्टियों की चिंता के कारण पीछे हट जाती थीं। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से भारत के श्रम कानूनों में अधिक समावेशी (Inclusive) बदलाव की उम्मीद है। यह फैसला निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों पर समान रूप से लागू होगा।

About The Author