Chhattisgarh Indefinite Hunger Strike : हौसले के आगे नतमस्तक हुआ मौसम! नवा रायपुर में तबाही के बाद भी अभ्यर्थियों का धरना अटूट

  • संघर्ष का रिकॉर्ड: पिछले 85 दिनों से लगातार आमरण अनशन पर डटे हैं अभ्यर्थी।
  • कुदरत का कहर: रात 3:30 बजे आए तूफान में टेंट फटा और सारा सामान तबाह हुआ।
  • अटल इरादे: भारी बारिश और तबाही के बावजूद धरना स्थल छोड़ने को तैयार नहीं युवा।

Chhattisgarh Indefinite Hunger Strike , नवा रायपुर — मंगलवार तड़के नवा रायपुर के धरना स्थल पर कुदरत ने भीषण प्रहार किया, लेकिन वहां डटे D.El.Ed अभ्यर्थियों का हौसला नहीं तोड़ पाई। पिछले 85 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहे इन युवाओं ने रातभर मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं का सामना किया। तूफान इतना जबरदस्त था कि उनका अस्थाई टेंट उखड़ गया और लाखों रुपये का नुकसान हुआ, फिर भी प्रदर्शनकारी अपनी जगह से नहीं हिले।

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3:30 बजे आई तबाही, शेड बना एकमात्र सहारा

घटनाक्रम के अनुसार, रात करीब 03:30 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाओं के झोंकों ने धरना स्थल पर लगे टेंट को चीर दिया। अभ्यर्थियों का खाना, बिस्तर और जरूरी दस्तावेज भीग कर बर्बाद हो गए। वर्तमान में सैकड़ों अभ्यर्थी केवल एक जर्जर अस्थाई शेड के नीचे सिमटकर अपना विरोध जारी रखे हुए हैं।

“तूफान ने हमारा टेंट फाड़ दिया और सामान उड़ा ले गया, लेकिन हमारी मांगों को नहीं दबा सका। हम 85 दिनों से यहाँ हैं और जब तक न्याय नहीं मिलता, हम पीछे नहीं हटेंगे।” — प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी

D.El.Ed अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब एक गंभीर मोड़ ले चुका है। कड़ाके की ठंड और अब बेमौसम बारिश के बीच ये युवा अपनी मांगों को लेकर अड़े हैं। लाखों का नुकसान झेलने के बाद भी अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी संपत्ति उनका संकल्प है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन न मिलना उनके गुस्से को और बढ़ा रहा है। आंधी-तूफान के बाद धरना स्थल की स्थिति दयनीय है, लेकिन अभ्यर्थियों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ रही है। अगले 24 घंटों में स्थानीय छात्र संगठनों के भी इस आंदोलन में शामिल होने की संभावना है।

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