छत्तीसगढ़ High Court’ का महत्वपूर्ण फैसला’ संपत्ति और आय छिपाना होगा मुश्किल, हलफनामे पर हो सकेगी क्रॉस एग्जामिनेशन

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High Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति और पत्नी दोनों को एक-दूसरे की आय और संपत्ति से संबंधित शपथ पत्र यानी हलफनामे पर क्रॉस एग्जामिनेशन करने का पूरा अधिकार होगा। अदालत के इस फैसले को पारिवारिक न्यायालयों में चल रहे भरण-पोषण से जुड़े मामलों के लिए अहम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए दुर्ग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक पति को पत्नी की आय और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल पूछने से रोक दिया गया था।

फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द

मामले में पति ने पत्नी की आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी पर सवाल उठाने और उससे जुड़े शपथ पत्र के संबंध में पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि दुर्ग स्थित फैमिली कोर्ट ने पति को इस संबंध में क्रॉस एग्जामिनेशन करने की अनुमति नहीं दी थी।

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इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि जब किसी पक्ष द्वारा आय और संपत्ति से संबंधित शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाता है, तो दूसरे पक्ष को उसमें दी गई जानकारी की सत्यता की जांच करने और आवश्यक सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए।

दोनों पक्षों को मिलेगा समान अधिकार

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में पति और पत्नी दोनों को समान रूप से एक-दूसरे की आर्थिक स्थिति से संबंधित जानकारी पर सवाल पूछने का अधिकार मिलेगा।

अदालत के निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मामले में आय, संपत्ति और आर्थिक स्थिति से जुड़ी सही जानकारी न्यायालय के सामने आ सके। क्रॉस एग्जामिनेशन के माध्यम से शपथ पत्र में दी गई जानकारी की पुष्टि या जांच की जा सकती है।

गुजारा भत्ता तय करने में आर्थिक स्थिति अहम

भरण-पोषण या गुजारा भत्ता तय करते समय पति और पत्नी दोनों की आय, संपत्ति, खर्च और आर्थिक जिम्मेदारियों को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में सही आर्थिक जानकारी न्यायालय को उचित निर्णय लेने में मदद करती है।

हाईकोर्ट के इस फैसले से अब दोनों पक्षों को अपनी बात रखने और दूसरे पक्ष द्वारा प्रस्तुत आर्थिक विवरण की जांच करने का अवसर मिलेगा। इससे मामलों की सुनवाई अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होने की उम्मीद है।

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