पुलिसकर्मी को प्रमोशन से वंचित करने पर High Court’ सख्त, विभाग को दिया अहम निर्देश
High Court’ बिलासपुर।’ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में पदोन्नति से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना संचयी प्रभाव के एक वेतनवृद्धि रोकने का दंड मामूली दंड की श्रेणी में आता है। ऐसे दंड को बड़ा दंड मानकर किसी कर्मचारी को पदोन्नति के लिए विचार किए जाने से वंचित नहीं किया जा सकता।
पुलिसकर्मी ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
यह मामला पुलिस विभाग में पदोन्नति से संबंधित है। याचिकाकर्ता शेखर सिन्हा ने सहायक उप निरीक्षक (ASI) पद पर पदोन्नति के लिए अपने दावे पर विचार नहीं किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि जिस दंड के आधार पर उनके पदोन्नति के दावे को प्रभावित किया गया, वह नियमों के अनुसार बड़ा दंड नहीं है।
एक वेतनवृद्धि रोकना माना मामूली दंड
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दंड की प्रकृति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की एक वेतनवृद्धि बिना संचयी प्रभाव के रोकी जाती है, तो इसका असर केवल संबंधित अवधि तक सीमित रहता है। इसे गंभीर या बड़े दंड की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने माना कि ऐसे मामूली दंड के आधार पर कर्मचारी को पदोन्नति के लिए विचार किए जाने से पूरी तरह बाहर करना उचित नहीं होगा।
पदोन्नति के दावे पर फिर से विचार का निर्देश
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता शेखर सिन्हा के पक्ष में आदेश दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि शेखर सिन्हा के सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के दावे पर नियमानुसार विचार किया जाए।
हाईकोर्ट के इस फैसले को पुलिस विभाग में पदोन्नति से जुड़े मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि मामूली दंड और बड़े दंड के बीच अंतर को ध्यान में रखकर ही पदोन्नति के मामलों में निर्णय लिया जाना चाहिए।









