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रजिस्टर्ड पोस्ट बंद, आमजन पर बढ़ा आर्थिक बोझ

कोरबा। भारतीय डाक विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2025 से पारंपरिक रजिस्टर्ड पोस्ट (Registered Post) सेवा बंद किए जाने के बाद अधिवक्ताओं, वादकारियों एवं आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पहले जहाँ कम शुल्क में न्यायालयीन नोटिस, कानूनी पत्राचार एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज रजिस्टर्ड डाक से भेजे जाते थे, वहीं अब उसी कार्य के लिए अपेक्षाकृत दोगुनी या उससे अधिक शुल्क वाली स्पीड पोस्ट सेवा का उपयोग करना पड़ रहा है। शहर जाने माने वरिष्ठ
अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि न्यायालयीन कार्यों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में नोटिस, जवाब, विधिक सूचनाएँ एवं अन्य दस्तावेज डाक के माध्यम से भेजे जाते हैं। रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा बंद होने के कारण अब प्रत्येक डाक पर पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। इसका सीधा असर अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्याय पाने वाले आम नागरिकों पर पड़ रहा है।


उन्होंने कहा कि सेवाओं का आधुनिकीकरण आवश्यक है, किंतु ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे आम नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़े। यदि स्पीड पोस्ट सेवा उपलब्ध कराई गई है, तो उसके साथ कम शुल्क वाली रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा को भी जारी रखा जाना चाहिए था, ताकि लोग अपनी आवश्यकता और आर्थिक क्षमता के अनुसार सेवा का चयन कर सकें।
धनेश कुमार सिंह ने केंद्र सरकार तथा भारतीय डाक विभाग से मांग की है कि 1 अक्टूबर 2025 से बंद की गई पारंपरिक रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा को पुनः प्रारंभ किया जाए अथवा अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन पत्राचार के लिए रियायती डाक शुल्क की विशेष व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुँच महंगी नहीं होनी चाहिए और जनहित से जुड़े इस निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है।

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