कोरबा में भू-माफिया के खिलाफ आक्रोश’ ‘बेनामी’ दस्तावेजों से आदिवासियों को बेदखल करने की साजिश, किसान सभा की हुंकार

कोरबा | शनिवार, 9 मई 2026 छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के भैसमा तहसील स्थित ग्राम पतरापाली में तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहाँ के आदिवासी किसानों ने आरोप लगाया है कि भू-माफियाओं का एक समूह फर्जी और ‘बेनामी’ दस्तावेजों के सहारे उनकी पूर्वजों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहा है। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल किया गया, तो उग्र आंदोलन होगा।

1990 का ‘फर्जी’ खेल: क्या है पूरा मामला?

किसानों का दावा है कि कुछ बाहरी लोग अचानक गांव में आकर उनकी कृषि भूमि को अपना बता रहे हैं। ये लोग 1990 के दशक के कुछ रजिस्ट्री पेपर और कागजात दिखा रहे हैं, जबकि पीड़ित आदिवासी परिवार दशकों से उस जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं।

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  • किसानों का तर्क: उनका कहना है कि उन्होंने कभी अपनी जमीन किसी को नहीं बेची। 1990 के जिन दस्तावेजों का हवाला दिया जा रहा है, वे या तो फर्जी हैं या किसी बेनामी सौदे का हिस्सा, जिसकी उन्हें जानकारी तक नहीं थी।

  • धमकी का आरोप: ग्रामीणों ने शिकायत की है कि शहर के कुछ रसूखदार लोग उन्हें जमीन खाली करने की धमकी दे रहे हैं और पुलिस बल का डर दिखा रहे हैं।

प्रशासन का रुख: जांच शिविर का आश्वासन

प्रदर्शन के दौरान डिप्टी कलेक्टर ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं। प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दो प्रमुख कदम उठाने का आश्वासन दिया है:

  1. विशेष जांच शिविर: पतरापाली गांव में जल्द ही एक विशेष राजस्व शिविर लगाया जाएगा, जहां जमीन के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति का मिलान किया जाएगा।

  2. कागजों की पड़ताल: 1990 के जिन संदिग्ध दस्तावेजों की बात की जा रही है, उनकी सत्यता की जांच जिला पंजीयक कार्यालय से कराई जाएगी।

किसान सभा की चेतावनी

किसान सभा के जिला सचिव ने कहा, “यह सिर्फ पतरापाली की बात नहीं है, पूरे कोरबा में आदिवासियों की जमीन पर भू-माफिया की नजर है। अगर प्रशासन ने इन ‘कागजी’ भू-माफियाओं पर लगाम नहीं लगाई, तो किसान अपनी जमीन बचाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।”

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