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CG News : मानवता शर्मसार 17 किलोमीटर तक खाट पर ‘सिस्टम’ को ढोते रहे बेबस ग्रामीण

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  • हृदय विदारक: कमार जनजाति के 60 वर्षीय मनू राम को इलाज के लिए 17 किलोमीटर तक पैदल और खाट पर ढोया गया।
  • सिस्टम फेल: पंचायत मुख्यालय पहुंचने के बाद भी सरकारी एम्बुलेंस सेवा नहीं मिल सकी।
  • निजी संघर्ष: परिजनों ने अंततः निजी गाड़ी किराए पर ली और मरीज को मैनपुर अस्पताल पहुंचाया।

CG News , गरियाबंद — छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की “ग्राउंड जीरो” रिपोर्ट एक बार फिर विचलित करने वाली है। मैनपुर क्षेत्र के सुदूर पहाड़ी इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को वह सब करना पड़ा जो आज के युग में अकल्पनीय है। गंभीर रूप से बीमार मनू राम को उनके बेटों और रिश्तेदारों ने 17 किलोमीटर तक कंधे पर खाट लादकर पथरीले रास्तों और पहाड़ों से नीचे उतारा।

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17 किलोमीटर का सफर और बेबस परिवार

कमार जनजाति से ताल्लुक रखने वाले मनू राम की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने मदद की गुहार लगाई थी। दुर्गम इलाका होने के कारण गांव तक वाहन पहुंचना मुश्किल था, लेकिन उम्मीद थी कि पंचायत मुख्यालय पर सरकारी मदद मिल जाएगी।

  • मरीज की उम्र: 60 वर्ष।
  • पैदल दूरी: लगभग 17 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता।
  • परिवहन का साधन: कंधे पर लकड़ी की खाट।
  • वर्तमान स्थिति: मैनपुर अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर।

हैरत की बात यह रही कि घंटों की मशक्कत के बाद जब परिवार नीचे पहुंचा, तब भी एम्बुलेंस का कहीं अता-पता नहीं था। थक-हारकर परिजनों ने कर्ज लेकर एक निजी वाहन का इंतजाम किया। इसके बाद उन्हें मैनपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

“हम सुबह से एम्बुलेंस का इंतजार कर रहे थे। पिताजी की हालत देख हमसे रहा नहीं गया। हम उन्हें खाट पर बांधकर पहाड़ों से उतार लाए, लेकिन नीचे भी कोई सरकारी मदद नहीं मिली। क्या हमारे जैसे गरीब लोगों के लिए कोई सिस्टम नहीं है?”
— मरीज के परिजन

गरियाबंद के मैनपुर और देवभोग जैसे इलाके अक्सर ऐसी खबरों की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। कमार जनजाति, जो विशेष पिछड़ी जनजाति में आती है, उनके लिए सरकार की तमाम योजनाएं कागजों पर तो भारी-भरकम दिखती हैं, लेकिन मनू राम जैसे लोगों की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। एम्बुलेंस का न पहुंचना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

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