चेक बाउंस प्रकरण में अभियुक्त को 6 माह की सजा, 2.58 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश
कोरबा। न्यायालय माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती सोनी तिवारी के न्यायालय द्वारा चेक अनादरण (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम) के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए दंडित किया गया है।
प्रकरण क्रमांक 2116/2022 (इंडियन बैंक विरुद्ध सुखमति साहू) में न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त द्वारा बैंक से प्राप्त एमएसएमई टर्म लोन की देनदारी के निर्वहन हेतु 2,00,000 रुपये का चेक जारी किया गया था, जो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण अनादरित (बाउंस) हो गया। इसके पश्चात विधिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद अभियुक्त द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया गया।
प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों एवं तर्कों पर विचार करने के पश्चात माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती सोनी तिवारी ने अभियुक्त को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत दोषी पाते हुए 6 माह के साधारण कारावास से दंडित किया। साथ ही न्यायालय ने अभियुक्त को आदेश दिया कि वह परिवादी को 2,58,000 रुपये प्रतिकर राशि एक माह के भीतर अदा करे। निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
इसके अतिरिक्त न्यायालय द्वारा अभियुक्त का जमानत मुचलका निरस्त (रद्द) करते हुए उसे अभिरक्षा में लेने का आदेश भी पारित किया गया।
उक्त प्रकरण में परिवादी की ओर से प्रभावी पैरवी अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह द्वारा की गई।
इस संबंध में अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि न्यायालय का यह निर्णय चेक अनादरण जैसे आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ऐसे निर्णयों से बैंकिंग व्यवस्था में लोगों का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है तथा देनदारियों का समय पर निर्वहन करने का संदेश भी मिलता है।
जारीकर्ता
धनेश कुमार सिंह अधिवक्ता कोरबा छत्तीसगढ़








