Haathiyon ka Utpaat : चार जिलों में हाथियों का आतंक, 4 ग्रामीणों की दर्दनाक मौत

Haathiyon ka Utpaat ,  बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इन दिनों हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 48 घंटों में चार जिलों—कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर और जशपुर—में 4 ग्रामीणों की मौत ने वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है और रात होते ही लोग अपने घरों से निकलने में भी डर रहे हैं।

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कोरिया में 11 हाथियों का झुंड, बुजुर्ग की झोपड़ी तोड़कर हत्या

गुरुवार रात कोरिया जिले में 11 हाथियों के दल ने कहर बरपा दिया। बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र के एक गांव में हाथियों ने पहले एक बुजुर्ग की झोपड़ी को गिरा दिया, और जब वह जान बचाने के लिए बाहर भागा, तो हाथियों ने दौड़ाकर कुचलदिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि झुंड पिछले तीन दिनों से गांव के आसपास मंडरा रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सरगुजा, बलरामपुर और जशपुर में भी नुकसान

सरगुजा में एक महिला की खेत से लौटते समय हाथियों ने घेरकर हत्या कर दी।
बलरामपुर के करौंधा क्षेत्र में हाथियों ने दो घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और एक युवक को हमला कर घायल कर दिया, जिसकी बाद में मौत हो गई।जशपुर में एक किसान जंगल से लकड़ी लेकर लौट रहा था, तभी हाथियों ने हमला कर उसकी जान ले ली।

ग्रामीणों में भय, वन विभाग की तैयारियों पर सवाल

लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं। लोगों का कहना है कि हाथियों के मूवमेंट की सूचना वन विभाग को पहले ही दे दी जाती है, लेकिन न तो गश्त बढ़ाई जाती है और न ही गांवों को अलर्ट किया जाता है।
कई जगहों पर वनकर्मियों की टीम देरी से पहुंची, जिससे जान-माल का नुकसान बढ़ गया।

हाथियों की बढ़ती आवाजाही बन रही बड़ी चुनौती

वन विभाग के अनुसार मानसून के बाद हाथियों का मूवमेंट प्राकृतिक रूप से बढ़ता है। इसके कारण भोजन और पानी की तलाश में झुंड अक्सर गांवों की ओर आ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन की कमी और तेजी से हो रही मानव बसाहट के कारण मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।

वन विभाग ने जारी किया अलर्ट

घटनाओं के बाद विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में टीमों को तैनात किया है। ड्रोन निगरानी और रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। गांवों में लाउडस्पीकर से अलर्ट जारी किया जा रहा है और लोगों को रात में समूह में रहने की सलाह दी जा रही है।

ग्रामीणों की मांग—मुआवजा और स्थायी समाधान

ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को तत्काल मुआवज़ा देने और हाथियों की आवाजाही पर स्थायी उपाय करने की मांग उठाई है। जनप्रतिनिधियों ने भी वन विभाग से कड़े कदम उठाने की बात कही है |

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