A Major Twist In The Koilwar Case : कोईलवर में 3 साल बाद पुलिस की ‘कैद’ से मुक्त हुए रामलला, ₹6 लाख के बांड पर मिली रिहाई
कोईलवर (भोजपुर): बिहार के भोजपुर जिले में आस्था और कानून की एक अनोखी जीत देखने को मिली है। कोईलवर थाना के मालखाना में पिछले तीन वर्षों से ‘कैद’ राम दरबार की सात अष्टधातु की मूर्तियों और एक बेशकीमती मुकुट को मंगलवार (10 फरवरी 2026) को आखिरकार रिहाई मिल गई। इन मूर्तियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 60 करोड़ रुपये आंकी गई है। न्यायालय के आदेश पर भारी सुरक्षा और पूजा-पाठ के बीच इन्हें वापस रामजानकी मठ ले जाया गया।
300 साल पुराना है इतिहास
सचिव के अनुसार, अष्टधातु की ये मूर्तियां लगभग 300 साल पुरानी हैं और मान्यता है कि इन्हें नेपाल के महाराजा ने मठ को भेंट किया था। इन मूर्तियों में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और लड्डू गोपाल की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमाएं शामिल हैं।
चोरी के 24 घंटे के भीतर हुई थी बरामदगी
यह मामला 21 जनवरी 2023 का है, जब बक्सर जिले के बड़का धकाईच स्थित रामजानकी मठ से इन मूर्तियों को चुरा लिया गया था। हालांकि, भोजपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अगले ही दिन 22 जनवरी को आरा-छपरा फोरलेन पर एक कार से सभी मूर्तियों को बरामद कर लिया था। तब से ये मूर्तियां कानूनी प्रक्रिया के कारण कोईलवर थाने के मालखाने में जमा थीं।
₹6 लाख के बेल बांड पर मिली रिहाई
मूर्तियों को मुक्त कराने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई। अंततः सीजीएम (CGM) न्यायालय के आदेश पर:
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बड़का धकाईच की सरपंच बिंदु देवी और कुसुम देवी ने 6 लाख रुपये का बेल बांड भरा।
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कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद मंगलवार को थानाध्यक्ष नरोतम चंद्र की मौजूदगी में मूर्तियां सौंपी गईं।
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थाने से निकलते ही श्रद्धालुओं ने ‘जय श्रीराम’ के नारों से पूरा इलाका गुंजा दिया।
बक्सर के मठ के लिए रवानगी
थाना परिसर में ही मूर्तियों का विधि-विधान से शुद्धिकरण और पूजा-पाठ किया गया। इसके बाद इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच बक्सर जिले के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र स्थित इनके मूल स्थान (रामजानकी मठ) के लिए रवाना कर दिया गया। इस मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण और रामभक्त मौजूद रहे।
“यह हमारे लिए केवल मूर्तियां नहीं, बल्कि हमारी विरासत और आस्था के प्रतीक हैं। तीन साल का इंतजार आज खत्म हुआ।” — कन्हैया दुबे, सचिव, रामजानकी मठ









