बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 लागू: बैंकों में गवर्नेंस और जमाकर्ताओं की सुरक्षा होगी मजबूत: प्रीति अग्रवाल

नई दिल्ली, 1 अगस्त 2025 देश में आज से बैंकिंग सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गए हैं। सरकार द्वारा अधिसूचित बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 आज से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs), सहकारी बैंकों और नियामक ढांचे में कई अहम सुधार किए गए हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य बैंकिंग गवर्नेंस को मजबूत बनाना, ऑडिट क्वॉलिटी को एवं पारदर्शिता को बेहतर करना और जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस कानून के तहत पांच प्रमुख बैंकिंग अधिनियमों—RBI एक्ट 1934, बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट 1949, SBI एक्ट 1955, तथा बैंकिंग कंपनियों (अधिग्रहण और ट्रांसफर) एक्ट 1970 व 1980—में कुल 19 संशोधन किए गए हैं। अब बड़े शेयरहोल्डरों की परिभाषा में बदलाव कर ₹2 करोड़ या कंपनियों की 10% पूंजी (जो भी कम हो) की सीमा तय की गई है, जिससे बैंकों में बाहरी नियंत्रण सीमित होगा और गवर्नेंस अधिक पारदर्शी बनेगी। साथ ही, सहकारी बैंकों के निदेशकों की अधिकतम अवधि 10 साल कर दी गई है, जिससे बैंक प्रबंधन में स्थिरता आएगी।

अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने अप्रयुक्त शेयर व बांड IEPF (निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि) में ट्रांसफर कर सकेंगे। ऑडिटरों के पारिश्रमिक की व्यवस्था बैंक खुद कर सकेंगे, जिससे बैंकों के ऑडिट में योग्यता और जिम्मेदारी बढ़ेगी। बैंकिंग रिपोर्टिंग को अब मासिक/त्रैमासिक आधार पर किया जाएगा, जो नियामकों व बैंकों दोनों के लिए रिपोर्टिंग बोझ घटाएगा।

THE FINOCRATS मानते हैं कि नया अधिनियम बैंकों की जवाबदेही और वित्तीय तंत्र में विश्वास को नई मजबूती देगा। इससे बैंकिंग सेक्टर में निवेश व आम जनता की जमा राशि की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुनिश्चित होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी बदलाव आज से देशभर में लागू हो गए हैं, जिससे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचेगी।

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