EPFO रजिस्ट्रेशन में बढ़ोतरी के बावजूद सामाजिक सुरक्षा सुधार पिछड़े हुए, रोजगार की मूल स्थिति में बड़ी बदलाव नहीं: प्रीति अग्रवाल

हालांकि हाल के आंकड़ों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकरण की संख्या में वृद्धि देखी गई है, लेकिन फॉर्मल सेक्टर में रोजगार की इस बढ़ोतरी का असर व्यापक रोजगार परिस्थितियों पर फिलहाल सीमित ही रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि EPFO में जो नए सदस्य जुड़े हैं, उनकी संख्या रोजगार बाजार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

EPFO के तहत फंड और बचत प्रीमियम में निरंतर इजाफा हो रहा है, लेकिन यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दीर्घकालीन सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को व्यापक रूप से मजबूत करने के लिए अभी भी अपर्याप्त माना जा रहा है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि फॉर्मल सेक्टर में रोजगार के विस्तार के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों में और अधिक क्रांतिकारी सुधार और विस्तार की जरूरत है।

विश्लेषकों ने कहा कि भारत में फैक्ट्री और असंगठित क्षेत्रों में रोजगार की अस्थिरता बनी हुई है, और सामाजिक सुरक्षा कवर अभी भी कई कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाया है। इसलिए, केवल EPFO के आंकड़ों में बढ़ोतरी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक सुधार तक नहीं पहुंचा पाई है।

सरकार और नियामक एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है कि वे फॉर्मल सेक्टर के रोजगार विस्तार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा के उपायों को और प्रभावी बनाएं, ताकि आर्थिक विकास का लाभ सीधे कामगारों तक पहुंच सके

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