कोरबा में SECL खदान के लिए अस्पताल तोड़ने पर बवाल, GM दफ्तर के बाहर ग्रामीणों का प्रदर्शन’ पुलिस से झड़प
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में SECL की खदान विस्तार परियोजना को लेकर विवाद सामने आया है। खदान के लिए अस्पताल भवन को तोड़े जाने के विरोध में ग्रामीणों ने GM कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति भी बनी। मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया।
अस्पताल भवन हटाने का विरोध
जानकारी के अनुसार खदान विस्तार के लिए प्रभावित क्षेत्र में स्थित अस्पताल भवन को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण GM कार्यालय के बाहर पहुंच गए।
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ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। उनका आरोप है कि भवन हटाने से पहले प्रभावित लोगों की चिंताओं और वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई।
GM कार्यालय के बाहर जुटे ग्रामीण
अस्पताल तोड़े जाने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने SECL के संबंधित कार्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल भवन को हटाने की कार्रवाई रोकने और उनकी मांगों पर अधिकारियों से चर्चा करने की मांग की।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई और दोनों पक्षों के बीच झड़प की स्थिति बन गई।
पुलिस से हुई झड़प
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। तनाव बढ़ने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं करने की बात कही। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
खदान विस्तार को लेकर पहले से विवाद
कोरबा जिले में SECL की खदानों के विस्तार और जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रभावित गांवों के लोगों की ओर से समय-समय पर विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। ग्रामीणों की प्रमुख चिंताओं में पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं।
अस्पताल भवन को हटाने का मामला भी इसी व्यापक खदान विस्तार प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों की जरूरी सुविधाओं को भी सुरक्षित रखना जरूरी है।









