CG News : सोने की बाली ढूंढने के टोटके का वीडियो बना मुसीबत, शिक्षिका पर गिरी निलंबन की गाज

CG News : जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक सरकारी शिक्षिका को स्कूल परिसर में कथित तौर पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। मामला बलौदा विकासखंड के काठापाली प्राथमिक शाला का है, जहां पदस्थ शिक्षिका गीता कुम्भकार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में स्कूल में गुम हुई सोने की बाली को खोजने के लिए कथित तौर पर टोटके का सहारा लिया जा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की है।

सोने की बाली गुम होने के बाद किया गया कथित टोटका

जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई को स्कूल परिसर में एक सोने की बाली गुम हो गई थी। इसके बाद उसे तलाशने के लिए कथित तौर पर पारंपरिक टोटके का सहारा लिया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

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वीडियो वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया और सरकारी विद्यालय में इस तरह की गतिविधि को लेकर सवाल उठने लगे।

वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया

मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराई। प्रारंभिक जांच में वीडियो को गंभीर मानते हुए शिक्षिका गीता कुम्भकार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

शिक्षा विभाग का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना आवश्यक है। ऐसे में अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियों को किसी भी रूप में प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।

शासकीय विद्यालयों में वैज्ञानिक सोच पर जोर

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच विकसित करने का माध्यम भी हैं। इसलिए शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें।

विभागीय अधिकारियों ने कहा कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को सेवा नियमों और आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूलों में अंधविश्वास जैसी गतिविधियों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की बात कही।

हालांकि, विभाग ने वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की है।

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