Supreme Court’ ने आवारा पशुओं के मुद्दे पर सरकारों को लगाई फटकार, हादसों के पीड़ितों के मुआवजे और जवाबदेही पर दिए अहम निर्देश

Supreme Court’ नई दिल्ली। देशभर में सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़क पर छोड़े गए पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाएं केवल यातायात का मुद्दा नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय हैं। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आवारा पशुओं की वजह से किसी व्यक्ति की जान जाती है या वह घायल होता है, तो पीड़ितों को उचित मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि पशुपालकों की जिम्मेदारी केवल पशु पालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने पशुओं की पूरे जीवन देखभाल और निगरानी की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

आवारा पशु बन रहे हैं हादसों की बड़ी वजह

देश के कई राज्यों में सड़कों पर घूमते मवेशियों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। विशेष रूप से रात के समय हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इन हादसों में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि संबंधित एजेंसियों और स्थानीय निकायों को इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

पीड़ितों को मुआवजा देने पर जोर

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी सड़क दुर्घटना का कारण आवारा पशु बनते हैं, तो पीड़ितों और उनके परिजनों को राहत मिलनी चाहिए। कोर्ट ने इस दिशा में प्रभावी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि दुर्घटना के शिकार लोगों को समय पर उचित मुआवजा मिल सके।

अदालत ने संकेत दिया कि इस संबंध में राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशु पालने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी केवल दूध या अन्य उपयोग तक सीमित नहीं हो सकती। यदि कोई पशुपालक अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ देता है, तो इससे समाज और अन्य लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। इसलिए पशुपालकों को अपने पशुओं की पूरे जीवन जिम्मेदारी निभानी चाहिए और उन्हें सार्वजनिक सड़कों पर नहीं छोड़ना चाहिए।

स्थानीय निकायों को भी सक्रिय होने के निर्देश

अदालत ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन को आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए प्रभावी नीति अपनानी चाहिए। पशुओं के लिए उचित आश्रय, पहचान व्यवस्था और निगरानी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

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