CG NEWS : जिला पंचायत में भारी हंगामा’ सीईओ के इंतजार में धरने पर बैठे जनप्रतिनिधि, मंत्री ने दी हटाने की चेतावनी
CG NEWS : कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच का टकराव चरम पर पहुंच गया है। जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग की कार्यशैली से नाराज होकर जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह समेत कई जनपद सदस्यों ने जिला पंचायत परिसर में ही धरना दे दिया। यह विरोध प्रदर्शन घंटों तक चला, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
घंटों इंतजार के बाद फूटा गुस्सा
मिली जानकारी के अनुसार, एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष और कई जनपद सदस्यों को शामिल होना था। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि वे घंटों तक सीईओ दिनेश कुमार नाग का इंतजार करते रहे, लेकिन सीईओ बैठक में नहीं पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारी की इस “बेरुखी” से नाराज जनप्रतिनिधि सीधे कार्यालय के बाहर परिसर में धरने पर बैठ गए।
कोरबा में मातृ दिवस 2026 पर भव्य आयोजन: ‘क्वीन ऑफ छत्तीसगढ़’ और मातृ शक्ति सम्मान ने जीता दिल
सीईओ पर लगाए गंभीर आरोप: अनदेखी और पारदर्शिता का अभाव
धरने पर बैठे जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह और अन्य सदस्यों ने सीईओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
-
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी: अधिकारियों द्वारा जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को उचित सम्मान और समय न देना।
-
मनमानी कार्यशैली: विकास कार्यों के निर्णयों में जनप्रतिनिधियों को भरोसे में न लेना।
-
पारदर्शिता की कमी: जिले में चल रहे विकास कार्यों और फंड के आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप।
-
इस्तीफे की चेतावनी: सदस्यों ने साफ कहा कि यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे सामूहिक इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
मंत्री लखनलाल देवांगन ने सख्त रुख अपनाया
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अधिकारियों की इस तरह की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए सीईओ को हटाने की चेतावनी दी है। मंत्री के दखल के बाद प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है।
“जब जनप्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं होगी, तो जनता का काम कैसे होगा? अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें, वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी।” — लखनलाल देवांगन (कैबिनेट मंत्री)
विकास कार्य हो रहे प्रभावित
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सीईओ की मनमानी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्य ठप पड़े हैं। फाइलों को अटकाया जा रहा है और पंचायतों को मिलने वाली राशि के वितरण में भेदभाव किया जा रहा है।









