CG Education Department Negligence : बच्चों की जान से खिलवाड़ , ‘रेत’ के भरोसे बन रहा स्कूल भवन, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

CG Education Department Negligence

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“हाथ लगाया और दीवार ढह गई”: भ्रष्टाचार की पोल खोलता वीडियो

वायरल वीडियो में स्थानीय ग्रामीण यह दिखाते हुए नज़र आ रहे हैं कि सीमेंट और ईंटों का जोड़ इतना कमज़ोर है कि उसे एक बच्चा भी हिला सकता है. घटिया सामग्री और रेत के अधिक उपयोग के कारण भवन की मज़बूती शून्य लग रही है. जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. “यह हमारे बच्चों का स्कूल है या उनकी कब्र? ऐसी दीवारों के नीचे कौन सुरक्षित महसूस करेगा?” एक स्थानीय नागरिक ने गुस्से में सवाल किया. बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में सरकार ‘नियद नेल्लनार’ जैसे अभियानों के तहत बुनियादी सुविधाएं पहुंचा रही है, लेकिन चिंगनेर का यह मामला ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है. वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं |

एसडीएम का सख्त रुख: “दोषी बख्शे नहीं जाएंगे”

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग के इंजीनियरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और निर्माण स्थल का फिर से ऑडिट किया जाएगा. प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि गुणवत्ता मानकों में कमी पाई गई, तो न केवल ठेकेदार का भुगतान रोका जाएगा, बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा. यह जांच रिपोर्ट अगले 48 घंटों में आने की उम्मीद है. एसडीएम ने कहा, “वीडियो हमारे संज्ञान में आया है. निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा. हमने टीम गठित कर दी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.” |

“हमें विकास चाहिए, भ्रष्टाचार नहीं. चिंगनेर का यह स्कूल हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए. अगर नींव ही कमज़ोर होगी, तो हम प्रशासन पर भरोसा कैसे करेंगे? हम इस मामले को आखिरी दम तक उठाएंगे.”
— स्थानीय ग्रामीण, चिंगनेर पंचायत

बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले में बुनियादी ढांचा तैयार करना पहले ही एक चुनौती है. ऐसे में भ्रष्टाचार के ये मामले सरकार की साख को नुकसान पहुंचाते हैं. अगले कुछ दिनों में यह तय होगा कि क्या प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देता है या वास्तव में निर्माण को नए सिरे से और मज़बूती से करवाता है. यह मामला अब जिले के अन्य निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक ‘वेक-अप कॉल’ बन गया है. क्या बीजापुर प्रशासन इस बार एक नजीर पेश कर पाएगा?

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