Cyber Fraud : डिजिटल डकैती , ऑनलाइन दवा मंगवाना पड़ा महंगा, रिटायर्ड बीएसपी कर्मी से ठग लिए 1 करोड़

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“दवा की होम डिलीवरी से जालसाजी का आग़ाज़”

पीड़ित, जो रायपुर के सेक्टर-1 में रहते हैं, ने कुछ महीने पहले एक वेबसाइट से नियमित दवाएं ऑर्डर की थीं. कुछ दिनों बाद, उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसने खुद को उस दवा कंपनी का प्रतिनिधि बताया. ठग ने दावा किया कि उनके ऑर्डर पर एक लकी ड्रा निकाला गया है और उन्होंने एक लक्जरी कार जीती है. शुरुआत में पीड़ित को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन ठगों ने उन्हें कंपनी के ‘नियमों’ का हवाला देकर फंसाना शुरू कर दिया. उन्होंने कार के ‘पंजीकरण’ और ‘रोड टैक्स’ के नाम पर पहली किस्त मांगी |

इसके बाद, ठगों ने कई अलग-अलग बहानों से पैसे मांगे. कभी ‘पार्षद’ से वेरिफिकेशन, कभी ‘जीएसटी’ और कभी ‘कस्टम क्लीयरेंस’ के नाम पर किस्तों में पैसे ऐंठे गए. यह सिलसिला महीनों तक चला. पीड़ित ने बताया कि वह पूरी तरह उनके झांसे में आ गया था और अपनी सारी जमा पूंजी, यहाँ तक कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी तुड़वा दी. जब तक उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तब तक वह 1.08 करोड़ रुपये खो चुके थे |

लापरवाही या नादानी: कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?

यह मामला इस बात पर गंभीर सवाल उठाता है कि कैसे एक शिक्षित, सेवानिवृत्त कर्मचारी इतनी बड़ी रकम अपराधियों के खातों में जमा करता रहा. रायपुर साइबर सेल के एक अधिकारी ने बताया कि अपराधियों ने मनोवैज्ञानिक दबाव और लालच का इस्तेमाल किया. वे हर बार एक नया ‘अधिकारी’ बनकर बात करते थे, जिससे पीड़ित को लगता था कि प्रक्रिया असली है. 2026 में भी, ऑनलाइन साक्षरता की कमी ऐसे हादसों की मुख्य वजह बन रही है.

हमें पता चला कि पीड़ित को अपने परिवार से बात करने से भी रोका गया था, ठगों ने कहा था कि यह ‘गोपनीय’ ड्रा है. इस तरह, परिवार को कुछ भी पता नहीं चला जब तक कि पूरी रकम खत्म नहीं हो गई. यह सिर्फ़ एक आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि एक विश्वास का टूटना भी है |

“साइबर पुलिस अलर्ट: जांच और आगे की राह”

शिकायत दर्ज होने के बाद, रायपुर पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में पता चला है कि ठगी की रकम देश के विभिन्न हिस्सों में फैले दर्जनों बैंक खातों में भेजी गई है. कुछ खाते तो फर्जी दस्तावेज़ों पर खोले गए थे. पुलिस अब इन खातों की ‘मनी ट्रेल’ और आईपी एड्रेस को ट्रैक कर रही है. अपराधियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है |

“यह एक बेहद संगठित साइबर अपराध है. हम इन अपराधियों को ट्रैक करने के लिए हर संभव तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे ऐसे किसी भी कॉल या लॉटरी के झांसे में न आएं. सतर्कता ही सुरक्षा है. अगर कोई भी सरकारी अधिकारी होने का दावा करता है, तो सीधे संबंधित दफ्तर जाकर पुष्टि करें.”
— रायपुर साइबर पुलिस अधिकारी

प्लेऑफ की दौड़ जैसा: अपराधियों को पकड़ने की चुनौती

इस मामले में अपराधियों को पकड़ना प्लेऑफ की दौड़ जैसा ही चुनौतीपूर्ण है, जहाँ हर पल महत्वपूर्ण है. साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने में माहिर होते हैं और देश-विदेश के सर्वरों का इस्तेमाल करते हैं. अगले कुछ हफ़्तों में पुलिस की कार्रवाई यह तय करेगी कि क्या पीड़ित को न्याय मिल पाएगा या अपराधियों ने अपनी पहचान पूरी तरह मिटा दी है. यह घटना 2026 में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर व्यक्ति के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है. क्या आप भी एक अनजान कॉल पर अपनी जीवन भर की कमाई दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं? सतर्क रहें, क्योंकि अगला शिकार कोई भी हो सकता है |

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