Now Studying Will Be Smart : एजुकेशन में टेक्नोलॉजी का धमाका’ छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में AI लागू, बच्चों की पढ़ाई होगी स्मार्ट
रायपुर | 8 अप्रैल, 2026 छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी डिजिटल युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य के सरकारी स्कूलों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की पठन-लेखन क्षमता और याददाश्त (स्मरण शक्ति) को बढ़ाने के लिए AI आधारित विशेष एप्लीकेशन लागू करने का निर्णय लिया है।
पायलट प्रोजेक्ट: दो जिलों से होगा शंखनाद
योजना के पहले चरण में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राज्य के दो चयनित जिलों में लागू किया जाएगा। इन जिलों में सफलता मिलने के बाद इसे पूरे प्रदेश के स्कूलों में विस्तार दिया जाएगा। हाल ही में रायपुर में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला में इस योजना की विस्तृत रूपरेखा और क्रियान्वयन की रणनीति तैयार की गई।
कैसे काम करेगा AI सिस्टम?
यह एप्लीकेशन केवल एक डिजिटल टूल नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत ट्यूटर की तरह काम करेगा:
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स्तर का आकलन: AI सबसे पहले हर बच्चे के सीखने के मौजूदा स्तर (Learning Level) का विश्लेषण करेगा।
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कस्टम रणनीति: जिन विषयों में बच्चा कमजोर है, AI उसे समझने के लिए व्यक्तिगत ‘लर्निंग पाथ’ और समाधान तैयार करेगा।
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डेटा-आधारित फीडबैक: शिक्षकों को रीयल-टाइम डेटा मिलेगा कि किस बच्चे को किस क्षेत्र में अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों को निजी स्कूलों के समकक्ष तकनीकी सुविधाएं प्रदान करना है।
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स्मरण शक्ति पर जोर: विशेष एल्गोरिदम के जरिए बच्चों की मेमोरी रिटेंशन पावर को ट्रैक किया जाएगा।
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डिजिटल साक्षरता: इससे न केवल बच्चों का विषय ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि वे भविष्य की तकनीक से भी परिचित होंगे।















