Chhattisgarh Electricity Bill Waiver 2026 : साय सरकार का ‘पावर’ गिफ्ट छत्तीसगढ़ में 29 लाख बिजली उपभोक्ताओं का बिल होगा आधा, MBBS योजना शुरू

Chhattisgarh Electricity Bill Waiver 2026

Chhattisgarh Electricity Bill Waiver 2026

Chhattisgarh Electricity Bill Waiver 2026  , रायपुर — छत्तीसगढ़ सरकार ने बिजली बिलों के बोझ तले दबे उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा ‘गेम-प्लान’ तैयार किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना (MBBS) को मैदान में उतार दिया है। इस योजना का सीधा फायदा उन 29 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगा जो कोरोना काल के बाद से आर्थिक तंगी के कारण अपना बकाया नहीं चुका पाए थे। सरकार ने इस राहत पैकेज के लिए 758 करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया है।

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आर्थिक राहत की नई पिच: कैसे काम करेगी MBBS योजना?

सरकार ने इस योजना को एक रणनीतिक बचाव (Strategic Defense) की तरह पेश किया है। जो उपभोक्ता लंबे समय से बिजली बिल के एरियर (बकाया) से जूझ रहे थे, उन्हें अब भारी छूट मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य उन घरेलू उपभोक्ताओं को दोबारा मुख्यधारा में लाना है जिनके कनेक्शन कटने की नौबत आ गई थी।

विष्णुदेव साय सरकार ने सत्ता संभालते ही यह साफ कर दिया था कि वे अंत्योदय (लाइन में खड़े आखिरी व्यक्ति) तक लाभ पहुंचाएंगे। यह योजना उसी रणनीति का हिस्सा है। 12 मार्च 2026 से शुरू हुई यह पहल सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब में बचत सुनिश्चित करेगी।

योजना के लॉन्च इवेंट के दौरान प्रशासन ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया। सीएम ने इसे जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हिस्सा करार दिया।

“कोरोना महामारी के दौरान हमारे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक कमर टूट गई थी। बकाया बिजली बिल एक बड़ी चुनौती बन गया था। MBBS योजना के जरिए हम 29 लाख उपभोक्ताओं के सिर से 758 करोड़ का बोझ हटा रहे हैं ताकि वे एक नई शुरुआत कर सकें।”
— मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

आने वाले दिनों में बिजली विभाग शिविर लगाकर इन बकाया बिलों का निपटारा करेगा। यह कदम केवल वित्तीय राहत नहीं है, बल्कि आगामी निकाय चुनाव और जनता के बीच ‘डिलीवरी’ के भरोसे को मजबूत करने की कोशिश है। राज्य के ऊर्जा विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि इतने बड़े स्तर पर डेटा प्रोसेस कर उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) की बैलेंस शीट में सुधार होगा क्योंकि जो पैसा ‘बैड डेट’ में फंस चुका था, उसका कुछ हिस्सा सरकार की सब्सिडी के जरिए वापस सिस्टम में आएगा।

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