High Court Absconding Prisoners : हाईकोर्ट में खुलासा पैरोल पर छूटे 38 में से 37 कैदी फरार, जेल प्रशासन फेल
High Court Absconding Prisoners
38 को मिली थी राहत, पुलिस पकड़ पाई सिर्फ एक
कोविड-19 के दौरान जेलों में भीड़ कम करने के लिए राज्य सरकार ने कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का निर्णय लिया था। शपथपत्र के अनुसार, पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद इन बंदियों को वापस जेल में सरेंडर करना था। हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी अधिकांश कैदी वापस नहीं लौटे। जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बावजूद अब तक केवल 1 कैदी को ही गिरफ्तार किया जा सका है। बाकी के 37 बंदी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
हाईकोर्ट ने इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े पैमाने पर कैदियों का गायब होना कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब अदालत खुद इसकी निगरानी करेगी ताकि इन फरार कैदियों की जल्द से जल्द धरपकड़ हो सके।
“38 बंदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था, जिनमें से 37 वापस नहीं आए हैं। विभाग उन्हें ढूंढने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हमने हाईकोर्ट को वर्तमान स्थिति से अवगत करा दिया है और कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है।”
— जेल महानिदेशक (DG Jail), छत्तीसगढ़
यह मामला केवल जेल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा है:
- सुरक्षा अलर्ट: फरार कैदियों में कई गंभीर अपराधों के दोषी हो सकते हैं। पुलिस अब इन अपराधियों के पुराने ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों पर दबिश दे रही है।
- पुलिस पर दबाव: बिलासपुर, रायपुर और अन्य प्रभावित जिलों के थानों को इन कैदियों की सूची भेजी गई है। इससे स्थानीय पुलिस पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।
- न्यायिक सख्ती: आने वाले समय में पैरोल के नियमों को और अधिक कड़ा किया जा सकता है, जिससे पात्र कैदियों को भी राहत मिलने में देरी हो सकती है।









