कोरबा में 16 साल बाद भी अधूरा न्याय, बालको चिमनी हादसे के पीड़ितों की पीड़ा बरकरार

कोरबा, 13 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बालको चिमनी हादसा को 16 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस भीषण दुर्घटना में मारे गए 41 मजदूरों के परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं। मामले की सुनवाई कोरबा के विशेष न्यायालय में अब भी जारी है, मगर चिमनी निर्माण से जुड़ी सेप्को कंपनी के तीन चीनी अधिकारी अब तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं।

उनकी ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि चीन से भारत के लिए सीधी उड़ान नहीं होने और यात्रा अनुमति नहीं मिलने के कारण वे कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके।

23 सितंबर 2009: औद्योगिक इतिहास का काला दिन

23 सितंबर 2009 को भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) के संयंत्र परिसर में 1200 मेगावाट बिजली परियोजना की निर्माणाधीन 240 मीटर ऊंची चिमनी अचानक ढह गई थी। उस समय बड़ी संख्या में मजदूर वहां काम कर रहे थे, जिससे 41 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश बिहार के सारण क्षेत्र के श्रमिक थे।

हादसे के बाद बालकोनगर थाना में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच में बालको प्रबंधन, सेप्को कंपनी, पेटी ठेका कंपनी जीडीसीएल और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया।

जांच में लापरवाही की पुष्टि

हादसे की जांच के लिए राज्य सरकार ने जस्टिस संदीप बख्शी की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। आयोग की रिपोर्ट में निर्माण में घटिया सामग्री, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संबंधित कंपनियों की गंभीर लापरवाही को हादसे का प्रमुख कारण बताया गया।

चीनी अधिकारी कोर्ट से दूर

चिमनी निर्माण का जिम्मा सेप्को कंपनी को दिया गया था। हादसे के बाद पुलिस ने कंपनी के तीन अधिकारियों—वू चुनान, लियु गैक्सन और वॉन वेगिंग—को आरोपी बनाया। अदालत ने नियमित सुनवाई के दौरान तीनों को पेश होने का आदेश दिया, लेकिन वे अब तक उपस्थित नहीं हुए।

कब तय होगी जिम्मेदारी?

16 साल बाद भी इस मामले में अंतिम फैसला नहीं हो सका है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या औद्योगिक सुरक्षा मानक पर्याप्त हैं और क्या अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय न्याय व्यवस्था के प्रति जवाबदेह बनाने का प्रभावी तंत्र मौजूद है।

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