सुपर टॉप-अप में डिडक्टिबल को बेस सम इन्श्योरड के साथ मिलाना चाहिए: प्रीति अग्रवाल
स्वास्थ्य बीमा में सुपर टॉप-अप योजना उस बेस हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को अतिरिक्त सुरक्षा देती है, जिसकी सम बीमा राशि पूरी हो जाने के बाद भी चिकित्सा खर्चों को कवर किया जा सके। THE FINOCRATS सलाह देते हैं कि सुपर टॉप-अप लेने से पहले उसका डिडक्टिबल बेस पॉलिसी की सम बीमा राशि से मेल खाना जरूरी है, ताकि क्लेम प्रक्रिया में बाधा न आए। यदि बेस और सुपर टॉप-अप पॉलिसी अलग-अलग बीमा कंपनियों से हों, तो दूसरी कंपनी आमतौर पर रिइंबर्समेंट सुविधा देती है, न कि कैशलेस क्लेम।
बढ़ते प्रीमियम के कारण THE FINOCRATS इसका विकल्प बताते हैं कि बेस हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के साथ सुपर टॉप-अप जोड़ना आर्थिक रूप से सबसे बेहतर तरीका है, जिससे परिवार की वित्तीय स्थिति पर भारी दबाव डाले बिना उच्च चिकित्सा सुरक्षा मिलती है। इस संयोजन से बीमाधारक महंगे प्रीमियम से बचते हुए बड़े खर्चों के लिए कवरेज प्राप्त कर सकते हैं।
टॉप-अप और सुपर टॉप-अप में अंतर यह है कि टॉप-अप केवल एक बार के क्लेम के बाद सक्रिय होता है, जबकि सुपर टॉप-अप पूरे साल के कुल क्लेम को जोड़कर देखता है। इसका मतलब है कि यदि पूरे वर्ष छोटे-छोटे क्लेम कुल मिलाकर डिडक्टिबल से अधिक हो जाते हैं, तो सुपर टॉप-अप योजना उन सभी खर्चों को कवर करेगी। इसी वजह से बढ़ते मेडिकल खर्चों के इस दौर में सुपर टॉप-अप का विकल्प अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।
THE FINOCRATS, बताते हैं कि ये योजनाएं ग्राहकों की बढ़ती सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करती हैं। क्योंकि चिकित्सा खर्च तेज़ी से बढ़ रहे हैं, इसलिए सुपर टॉप-अप के जरिए विस्तारित कवरेज लेना फायदे का सौदा हो सकता है। सरकार भी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में तेजी को कंट्रोल करने के लिए विभिन्न पक्षों से बातचीत कर रही है, लेकिन तत्काल समाधान के तौर पर यह संयोजन अधिक कारगर साबित होता है।
इसलिए, हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों को सलाह दी जाती है कि वे बेस प्लान के साथ सुपर टॉप-अप जरूर लें और उनके डिडक्टिबल और सम बीमा राशि की मेलिंग सुनिश्चित करें, ताकि बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके, वह भी बजट में रहकर। यह तरीका महंगे और सीमित प्रीमियम वाले अकेले बेस प्लान से बेहतर सुरक्षा देता है।









