डीएवी खरमोरा में मनाया गया राष्ट्रीय एकता दिवस
आज डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल खरमोरा कोरबा के विद्यालय प्रांगण में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह का शुभारंभ प्राचार्य श्री हेमंतो मुखर्जी तथा शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में छात्रों ने भाषण कविता तथा क्विज आदि की प्रस्तुति दी। छात्रों की प्रस्तुति के पश्चात शिक्षिका यामिनी तथा चेतना ने छात्रों को सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा भारत को एक सूत्र में बंधने तथा गणराज्य बनाने में उनके द्वारा किए गए कार्यों से छात्रों को परिचित कराया। प्राचार्य श्री हेमंतो मुखर्जी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत को एक सूत्र में बांधने तथा भारत को एक गणराज्य बनाने में सरदार पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत की स्वतंत्रता से पूर्व संपूर्ण क्षेत्र को भारत वर्ष के नाम से जाना जाता था किंतु भारतवर्ष का नाम होते हुए भी राजतंत्र होने के कारण हमारा देश अलग-अलग राज्य एवं रियासतों में विभाजित था। जिन पर तत्कालीन राजा पेशवा नवाब तथा बादशाहों का शासन था। उनके राज्य या रियासतों की अपनी अलग-अलग सीमाएं थीं। जिन पर दूसरे राजा नवाब या बादशाहों के अतिक्रमण करने पर परस्पर युद्ध होते थे। भारत की स्वतंत्रता बटवारा लेकर आई और अंग्रेजों ने मानचित्र पर लकीरें खींचकर भारत के दो टुकड़े कर दिए। आजादी का सुबह बटवारा लेकर आया। बटवारा होने के पश्चात एक टुकड़ा हिंदू राष्ट्र तथा दूसरा टुकड़ा मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर दिया गया। सदियों से हमारे पूर्वज परस्पर प्रेम और सौहार्द्र से रहते थे किंतु बंटवारे के पश्चात लोगों का परस्पर प्रेम एवं सौहार्द न जाने कहां विलीन हो गया। एकजुट होने की परंपरा न जाने कहां खो गई। कई पीढियों से एक साथ रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर एक दूसरे पर प्राण न्योछावर करने वाले लोग परस्पर शत्रु हो गए और एक दूसरे को मारने काटने लगे। ऐसे कठिन समय में भारत की रियासतों राज्यों तथा जगीरो को एक में विलय करके एक गणराज्य बनाने तथा सभी को एक सूत्र में बांधने का दुरुह एवं संवेदनशील कार्य भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को सौंपा गया। उन्होंने इस कार्य को पूर्ण करने के लिए अपनी समस्त शक्तियां झोंक दी और अंततः 563 रियासतों राज्यों एवं जगीरो का विलय करके भारत एक स्वतंत्र गणराज्य के रूप में उभरा। यही कारण है कि सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। उनके इस योगदान के कारण उन्हें सन् 1991 में उनकी मृत्यु के 41 वर्ष के बाद भारत रत्न की उपाधि दी गई तथा प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्मदिन को सन् 2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया। सरदार पटेल के कार्यों से प्रेरित होकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 28 फरवरी 2024 में तमिलनाडु के तूतीकोरिन नामक स्थान में एक भारत श्रेष्ठ भारत का नारा दिया गया। प्रधानमंत्री जी के द्वारा सरदार पटेल की 182 मी ऊंची प्रतिमा का निर्माण कराया गया तथा इसका नाम स्टैचू ऑफ यूनिटी रखा गया। यह प्रतिमा सरदार वल्लभभाई पटेल की दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर असंभव कार्य को भी संभव कर दिखाने का प्रतीक है। अंत में प्राचार्य मुखर्जी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसके संगठन में होती है इसलिए हम सभी भारतीयों को हमेशा संगठित रहना होगा तथा राष्ट्र को विकास की ओर अग्रसर करना होगा। इसके साथ ही प्राचार्य मुखर्जी ने सभी को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई एवं दिन विशेष की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम के पश्चात विद्यालय प्रांगण में वैदिक हवन भी कराया गया जिसमें विद्यालय के सभी लोग उपस्थित थे








