एनएच टोल प्लाज़ा पर बीच सड़क में बैठीं गायें—मानो धरना दे रही हों,फिर भी सरकार खामोश!

कोरबा। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर एक अजीब लेकिन चिंताजनक दृश्य देखने को मिला — टोल प्लाज़ा के बीचोंबीच, ठीक बैरियर के सामने कई गायें बैठी नज़र आईं। ये दृश्य ऐसा लग रहा था मानो गायें मौन धरना दे रही हों, सरकार और प्रशासन की लापरवाही के ख़िलाफ़ अपनी पीड़ा बयान कर रही हों।

गौरतलब है कि इसी मार्ग पर रोज़ाना कई गायों की जान जा रही है। तेज़ रफ़्तार वाहनों की चपेट में आकर बेसहारा गायें दम तोड़ रही हैं। लेकिन अब ये दृश्य और भी सवाल खड़े कर रहा है — क्या यह ‘धरना’ प्रशासन की संवेदनहीनता की प्रतीक तस्वीर नहीं है?

स्थानीय लोगों ने कहा कि “सरकार खुद को गौ-रक्षक बताती है, लेकिन आज सड़क पर गायें अपनी जान जोखिम में डालकर बैठी हैं और कोई देखने वाला नहीं।”

पूर्व सरकार के समय की कोठानें (गौशालाएं) आज भी उपेक्षा का शिकार हैं। गौ-प्रेमियों का कहना है कि यह मुद्दा केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वास्तविक व्यवस्था सुधार की ज़रूरत है।

लोगों की मुख्य मांगें —

1. एनएच टोल के पास गायों की सुरक्षा और पुनर्वास की तत्काल व्यवस्था की जाए।

2. सभी कोठानों की स्थिति की समीक्षा कर स्थायी समाधान निकाला जाए।

3. सरकार अपनी “गौ-रक्षा” नीति पर ठोस कदम उठाए, न कि केवल बयानबाज़ी।

 

अब सवाल उठता है — हिंदुत्व समर्थक सरकार की यह खामोशी आखिर क्यों?
क्या गौ-रक्षा केवल भाषणों तक सीमित रह गई है, जबकि सड़कों पर गायें अपनी जान जोखिम में डालकर प्रशासन को आईना दिखा रही हैं

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