सोना नहीं, इस साल चांदी ने दिखाया असली दम: क्यों 50% रिटर्न से गोल्ड को हराया: प्रीति अग्रवाल

साल 2025 में सोने की कीमतें भले ही 40% बढ़ी हों, लेकिन चांदी ने निवेशकों को 50% तक रिटर्न देकर गोल्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। डॉलर में भी चांदी ने लगभग 46% रिटर्न दिया है, जबकि गोल्ड 37% बढ़ा। इसकी वजह यही रही कि चांदी एक साथ सुरक्षित निवेश और औद्योगिक मांग का फायदा उठाती है, जबकि सोना केवल सुरक्षित आश्रय का विकल्प है।आज की वैश्विक आर्थिक परिस्थिति में निवेशक लगातार अनिश्चितता से चिंतित हैं—अमेरिका की ट्रंप सरकार की व्यापार नीतियां, रोज़ बदलती खबरें और जियोपॉलिटिकल तनाव ने सेफ हेवन की मांग बढ़ा दी है। इस माहौल में जहां गोल्ड निवेशकों की पहली पसंद रहा, वहीं चांदी को भी फायदा मिला—क्योंकि इसमें औद्योगिक मांग के चलते तेज़ी आती है जब आर्थिक गतिविधियां भी सशक्त रहती हैं।जानकार मानते हैं कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में केवल गोल्ड ही नहीं, बल्कि चांदी भी शामिल करनी चाहिए। गोल्ड अंतिम सुरक्षित विकल्प बना रहेगा, पर चांदी छोटी मात्रा में पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफ़ाई करती है और अच्छा अतिरिक्त रिटर्न दे सकती है। बेशक, अगर स्टॉक बाज़ार गिरता है तो चांदी की परफॉर्मेंस सोने से कमज़ोर हो सकती है, मगर आर्थिक तेजी के दौर में चांदी बेहतर रिटर्न देती है।निवेश विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस साल चांदी आखिर क्यों चमकी, समझें और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के साथ-साथ डाइवर्सिफाई जरूर करें। निवेश के फैसले से पहले सलाहकार से बात करें, और भावनाओं में आकर बड़ी मात्रा न लगाएं—क्योंकि सही स्ट्रैटेजी लंबे समय में ही रिटर्न देती है।

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