CG NEWS : मिडडे मील में गड़बड़ी का खुलासा, कलेक्टर की सख्ती से 4 अधिकारी निलंबित
बीजापुर।’ छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से भ्रष्टाचार का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ के पोटाकेबिन आवासीय विद्यालयों में बच्चों के नाम पर मिलने वाले सरकारी राशन और मेस बजट में लाखों रुपये की हेराफेरी की गई है। इस गंभीर अनियमितता की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 4 प्रभारी अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
फर्जी उपस्थिति और राशन का खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि आवासीय विद्यालयों में बच्चों की वास्तविक संख्या कम होने के बावजूद कागजों पर फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। इस फर्जीवाड़े के जरिए:
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राशन की हेराफेरी: बच्चों के नाम पर अतिरिक्त राशन आवंटित कराकर उसे बाजार में खपाया जा रहा था।
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मेस चार्ज में घोटाला: भोजन मद से मिलने वाली राशि का फर्जी भुगतान दिखाया गया और मेस चार्ज का कोई सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
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लाखों का चूना: प्राथमिक अनुमान के मुताबिक, इस घोटाले के जरिए शासन को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान पहुँचाया गया है।
इन अधीक्षकों पर गिरी गाज
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन चार छात्रावास अधीक्षकों को निलंबित किया गया है, उन पर कर्तव्य में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप हैं। जांच टीम ने पोटाकेबिनों का आकस्मिक निरीक्षण किया था, जहाँ स्टॉक रजिस्टर और मौके पर मौजूद सामान में भारी अंतर पाया गया।
जांच के घेरे में अन्य पोटाकेबिन भी
बीजापुर में पोटाकेबिन व्यवस्था का उद्देश्य अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों को सुरक्षित शिक्षा और भोजन उपलब्ध कराना है। इस घोटाले के सामने आने के बाद जिले के अन्य आवासीय विद्यालयों की भी जांच शुरू कर दी गई है। सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
ग्रामीणों और अभिभावकों में रोष
इस खबर के बाद स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जहाँ एक ओर सरकार बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं कुछ भ्रष्ट कर्मचारी बच्चों के हक का अनाज चोरी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि निलंबित अधीक्षकों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई न होकर एफआईआर (FIR) भी दर्ज की जाए।









