गलत ITR फाइल की है? ऐसे करें सुधार, बचें जुर्माना और रिफंड में देरी से: प्रीति अग्रवाल
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय आय छूट या कटौती का मिस होना, गलत ITR फॉर्म का चयन या व्यक्तिगत जानकारी में त्रुटि होना आम है। लेकिन ऐसी गलतियों को समय रहते ठीक करना जरूरी है ताकि विभाग की जांच, लेट फीस या रिफंड में देरी से बचा जा सके।
आयकर नियमों के तहत अगर आपने गलत ITR फाइल कर दी है, तो सेक्शन 139(5) के तहत “संशोधित रिटर्न” (Revised Return) भरा जा सकता है। इसका मतलब, आपको अपनी पुरानी गलती की जगह नया सही रिटर्न डालने का अवसर मिलता है—यह 31 दिसंबर 2025 (आय वर्ष 2025-26 के लिए) या असेसमेंट पूरा होने से पहले तक कभी भी किया जा सकता है। संशोधित रिटर्न भरने पर कोई अतिरिक्त पेनल्टी नहीं लगती; अगर चूक से टैक्स ज्यादा चुका दिया है तो रिफंड भी मिल सकता है, जबकि कम टैक्स देने की स्थिति में ब्याज व जुर्माना देना पड़ सकता है.
यदि टैक्स डिपार्टमेंट से किसी तरह की ‘अति-त्रुटि’ या डाटा मिसमैच का नोटिस मिले, तो सेक्शन 154(1) के तहत “रिक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट” भी ऑनलाइन पोर्टल से भरी जा सकती है। यह सिर्फ तब काम आती है जब सिर्फ डाटा का एडजस्टमेंट करना हो, न कि आय या नए डिडक्शन जोड़ना हो। रेक्टिफिकेशन में बैंक अकाउंट या एड्रेस बदलना संभव नहीं; इसके लिए सामान्य रिवाइज्ड रिटर्न का ही विकल्प चुनना चाहिए.
संशोधित या रेक्टिफाइड रिटर्न भरने के लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें, ‘रीवाइज्ड रिटर्न’ या ‘रेक्टिफिकेशन’ ऑप्शन चुनें, ओरिजिनल रिटर्न की डिटेल्स भरें, प्रॉपर ITR फॉर्म चुनें, सही जानकारी अपडेट करें और ‘ई-वेरिफिकेशन’ पूर्ण करें। इस प्रक्रिया के बाद नया सही रिटर्न ही अंतिम माना जाएगा.
अगर रिटर्न व अस्सेसमेंट का समय निकल जाए, तो सेक्शन 139(8A) के तहत “अपडेटेड रिटर्न” भरा जा सकता है, लेकिन इसमें अतिरिक्त टैक्स और जुर्माना देना पड़ता है।
The Finocrats मानते हैं कि गलत ITR को समय रहते सुधारना करदाता की जिम्मेदारी है—यह न सिर्फ जुर्माने और विभागीय कार्रवाई से बचाता है बल्कि रिफंड और टैक्स क्लियरेंस में तेजी भी लाता है। हर बार फाइलिंग के बाद रिटर्न की पूरी जांच कर लें, कोई त्रुटि हो तो संशोधित या रिक्टिफाई जरूर करें।









