15 सितंबर के बाद देर से ITR फाइल करने पर सिर्फ जुर्माना ही नहीं, आपकी सेविंग पर होगा बड़ा असर: प्रीति अग्रवाल
अगर आप 15 सितंबर की अंतिम तिथि के बाद अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं, तो इसका असर सिर्फ विलंब शुल्क पर नहीं, आपकी कुल बचत और टैक्स विकल्पों पर भी पड़ सकता है। The Finocrats के मुताबिक, देर से रिटर्न फाइल होने पर न केवल ₹5,000 तक का जुर्माना देना है (सिर्फ जिनकी कुल आय ₹5 लाख से कम है उनके लिए यह ₹1,000 तक सीमित होता है), बल्कि पुराने टैक्स स्लैब वाले ‘पुराने रेगिम’ का विकल्प भी खो सकते हैं, जिससे कई करदाताओं को अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ सकता है.
दरअसल, अगर आप निर्धारित समय तक रिटर्न नहीं फाइल करते तो सेक्शन 139(4) के तहत विलंबित रिटर्न की सुविधा जरूर मिलती है, पर इसके साथ ही ब्याज की दरें बढ़ जाती हैं और जो रिफंड मिलना था उसमें भी देरी होती है। वित्त वर्ष पूरा होने के बाद टैक्सपेयर्स को रिटर्न के संभावित रिफंड पर अधिक ब्याज चुकाना पड़ता है, जिससे टैक्स सेविंग की जगह सरेंडर का जोखिम रहता है.
गौर करने वाली बात यह भी है कि देर से फाइल की गई ITR पर स्क्रूटनी या विभागीय जांच का खतरा बढ़ जाता है, और अगर रिटर्न, फॉर्म 26AS या टीडीएस डिटेल में कोई अंतर है तो रिफंड प्रोसेस में लंबा इंतजार भी संभव है। वहीं, समय रहते ITR फाइल करने वालों को प्रोसेसिंग जल्दी होती है और टेक्निकल गड़बड़ियों व नोटिस का खतरा भी कम रहता है.
The Finocrats का कहना है कि सिर्फ जुर्माने या लेट फीस से अधिक नुकसान टैक्स विकल्प, ब्याज की अधिक दर व रिफंड में देरी की वजह से होता है, जिससे आपकी सेविंग पर सीधा असर आता है। इसलिए, सभी टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि 15 सितंबर तक ही अपना रिटर्न सही विवरण और दस्तावेजों के साथ फाइल करें, ताकि न सिर्फ पेनल्टी बच सके, बल्कि टैक्स की बर्बादी और फाइनेंशियल अनिश्चितता से भी सुरक्षित रहें।









