जिम में लगी चोट का खर्च उठाएगा बीमा? पॉलिसी की शर्तें कर सकती हैं इंकार: प्रीति अग्रवाल
आजकल फिटनेस का शौक लोगों के बीच तेजी से बढ़ रहा है और जिम जाकर वर्कआउट करना आम हो गया है। लेकिन कई बार ज़्यादा मेहनत या किसी दुर्घटना के कारण चोट लग जाती है और इलाज का खर्च अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में अधिकतर लोग यह मानकर चलते हैं कि उनका हेल्थ इंश्योरेंस इस खर्च को ज़रूर कवर करेगा। हालांकि हकीकत हर बार इतनी आसान नहीं होती। बीमा कंपनियां कई बार कुछ खास परिस्थितियों का हवाला देकर ऐसे दावों को खारिज कर देती हैं।
The Finocrats का कहना है कि सामान्य वर्कआउट या वजन उठाने के दौरान हुई चोटें ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस कवर में आती हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने व्यायाम करते समय पैर मोड़ लिया या मशीन से चोट लग गई और उसे चिकित्सकीय उपचार की ज़रूरत पड़ी तो खर्च का भुगतान आमतौर पर बीमा के तहत संभव है। लेकिन अगर चोट की वजह ऐसी हो जो जोखिमपूर्ण या असुरक्षित प्रथाओं से जुड़ी हो, तब मामला जटिल हो सकता है।
कई बीमा पॉलिसियों में स्पष्ट रूप से उल्लेख होता है कि स्टेरॉयड या परफॉर्मेंस-बूस्टिंग ड्रग्स के सेवन से जुड़ी समस्याओं को कवर नहीं किया जाएगा। इसी तरह ‘एडवेंचरस स्पोर्ट्स’ या ख़तरनाक प्रयासों के दौरान हुई दुर्घटनाओं को भी कई पॉलिसियों से बाहर रखा जाता है। ऐसी स्थिति में जिम में किसी खतरनाक स्टंट या अत्यधिक वज़न उठाने की गलत कोशिश से हुई चोट का दावा अस्वीकार किया जा सकता है।
बीमा सलाहकारों का सुझाव है कि पॉलिसी लेते समय उसके नियम और शर्तों को अच्छी तरह पढ़ना बेहद ज़रूरी है। बहुत से ग्राहक यह मान लेते हैं कि सभी तरह की मेडिकल इमरजेंसी बीमा में शामिल होती हैं लेकिन बाद में दावा खारिज होने पर उन्हें न केवल आर्थिक दबाव बल्कि मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है।
इसलिए ज़रूरी है कि जिम में चोट लगने की स्थिति में इलाज का खर्च उठाने से पहले यह देखें कि आपकी बीमा पॉलिसी में किन परिस्थितियों को शामिल किया गया है और किन्हें नहीं। जागरूकता और सही जानकारी के सहारे ही आप अनचाहे वित्तीय बोझ से बच सकते हैं।









