2025 में RBI के नए पर्सनल लोन नियम: उधारकर्ताओं के लिए क्या बदला? प्रीति अग्रवाल

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पर्सनल लोन को लेकर इस साल कई अहम नए नियम लागू किए हैं, जिनसे उधारकर्ताओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को काफी मजबूती मिली है। इन बदलावों के तहत अब बैंकों और एनबीएफसी को उधार देने की प्रक्रिया में अधिक सतर्कता, डॉक्यूमेंटेशन और जोखिम प्रबंधन अपनाना होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब कोई भी व्यक्ति अपनी मासिक आय का अधिकतम 50% तक ही ईएमआई भर सकेगा—इसमें नया और पुराने सभी सक्रिय लोन शामिल होंगे। बार-बार लोन एप्लाई करने या स्वयं-घोषित कर्ज की जानकारी अब मान्य नहीं होगी और सभी लोन की पुष्टि बैंक/एनबीएफसी द्वारा की जाएगी। इससे उधारकर्ता अपनी आय से ज्यादा कर्ज लेने से बच सकेंगे, जिससे फाइनेंशियल स्ट्रेस घटेगा।

दूसरा बड़ा नियम क्रेडिट स्कोर आधारित स्वीकृति का है। अब आपका क्रेडिट स्कोर ही लोन पात्रता का आधार होगा; कम स्कोर पर लोन राशि कम या ब्याज दर ज्यादा लग सकती है। लगातार लोन के लिए अप्लाई करने से क्रेडिट स्कोर गिर सकता है, इसलिए आवेदन के बीच अंतराल जरूरी है। बैंकों और एनबीएफसी को अब बिना गारंटी वाले लोन पर ज्यादा पूंजी रखना होगा—जहां जोखिम भार 100% था, अब 125% या अधिक हो गया है। उच्च जोखिम वाले ग्राहकों के लिए यह 150% तक पहुंच सकता है, जिससे पहली बार लोन लेने वालों या कम स्कोर वालों के लिए लोन प्रक्रिया सख्त होगी।

KYC और आय सत्यापन भी बहुत कड़ा कर दिया गया है। अब बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न (ITR) और रोजगार स्थिति का पूरा सत्यापन जरूरी है। “Same-day” लोन स्वीकृति सिर्फ दस्तावेजी सत्यापन के बाद ही संभव होगी, खासकर गिग वर्कर्स और स्व-नियोजित के लिए।

डिजिटल लेंडिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकार को बढ़ाया गया है। सभी जरूरी शर्तें, ब्याज दर, अवधि, ईएमआई, जुर्माना और Key Facts Statement (KFS) स्पष्टता के साथ बताना अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ता बेहतर तुलना और निर्णय कर सके।

आय के आधार पर लोन पात्रता की सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है; उदाहरण के तौर पर ₹50,000 मासिक आय पर अधिकतम ईएमआई ₹15,000 और अनुमानित लोन लिमिट तीन साल के लिए ₹4.8 लाख होगी। इन प्रतिबंधों के चलते अब एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेना बहुत मुश्किल हो गया है।

इन नियमों का उद्देश्य यह है कि उधारकर्ता अपनी क्षमता के अनुसार ही लोन ले और आवश्यकता से अधिक कर्ज लेकर फाइनेंशियल दिक्कत में न पड़े। बैंकों और एनबीएफसी को भी डिफॉल्ट के जोखिम से बचाव मिलेगा और प्रणाली में पारदर्शिता, जिम्मेदारी आएगी।

THE FINOCRATS मानते हैं कि इन बदलावों के बाद भारत में लोन लेने की प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और वित्तीय अनुशासन वाली बन गई है। उधारकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे लोन लेने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर सुधारें, EMI क्षमता समझें तथा सभी ऑफर्स की अच्छे से तुलना करें।

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