RBI गवर्नर बोले: मिनिमम बैलेंस तय करने के लिए बैंक पूरी तरह स्वतंत्र, ग्राहकों को अलग-अलग नियमों पर ध्यान देना जरूरी: प्रीति अग्रवाल
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस की सीमा तय करने का अधिकार बैंकों को दिया गया है। यह विषय RBI के “रेगुलिटरी डोमेन” में नहीं आता—अर्थात हर बैंक अपनी नीति और ग्राहकों की आवश्यकता को देखते हुए अपनी मनचाही मिनिमम बैलेंस सीमा तय कर सकता है। उन्होंने कहा, “हर बैंक का अपना मिनिमम बैलेंस नियम है, और इसमें कोई केंद्रीय नियंत्रण नहीं है”।
एसबीआई, पीएनबी सहित कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस की बाध्यता हटा दी है, खासकर जन धन और बेसिक सेविंग खातों के लिए। कई बैंक मिनिमम बैलेंस मात्र ₹2,000 या ₹10,000 तक रखते हैं। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक की नीति अवश्य जांचें और गैर-पालन की स्थिति में लगने वाली संभावित पेनल्टी से अवगत रहें।
THE FINOCRATS का कहना है कि यह व्यवस्था प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगी, साथ ही ग्राहकों के पास अपनी सुविधा के अनुसार उपयुक्त बैंक चुनने का विकल्प भी रहेगा। RBI ने डिजिटल बैंकिंग को अपनाने और वित्तीय समावेशन के अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की भी सलाह दी है।















