तांबे (Copper) ने क्यों मचाई है ग्लोबल मार्केट में हलचल? जानिए ताजा वजह: प्रीति अग्रवाल
ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बूम:
दुनिया भर में क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट्स में तांबे की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। एक इलेक्ट्रिक कार में पारंपरिक गाड़ी के मुकाबले 3-4 गुना ज्यादा तांबा लगता है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटलाइजेशन:
बिजली के ग्रिड, डेटा सेंटर, स्मार्ट सिटी और डिजिटल नेटवर्क के विस्तार में भी तांबे की अहम भूमिका है।
सप्लाई में बाधाएं और कीमतों में उछाल
माइनिंग में दिक्कतें:
चिली, पेरू जैसे बड़े उत्पादक देशों में खनन में रुकावटें, लेबर विवाद और खराब मौसम ने सप्लाई घटा दी है। नई खदानों को चालू होने में 15-25 साल तक लग सकते हैं, जिससे सप्लाई जल्दी नहीं बढ़ सकती।
ओर क्वालिटी में गिरावट:
पुरानी खदानों में अब कम गुणवत्ता वाला तांबा मिल रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है।
जियोपॉलिटिकल रिस्क:
प्रमुख उत्पादक देशों में राजनीतिक अस्थिरता और नए टैक्स-नियम भी सप्लाई को प्रभावित कर रहे हैं।
चीन और भारत की बड़ी भूमिका
चीन दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता:
अकेले चीन 50% से ज्यादा तांबा इस्तेमाल करता है। भारत में भी शहरीकरण और इंडस्ट्रियल ग्रोथ से डिमांड तेज है।
कीमतों में रिकॉर्ड तेजी
2025 में तांबे की कीमतों में 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी:
पिछले एक महीने में ही कीमतों में 14% की उछाल देखी गई है। अमेरिका में तो तांबे के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
आगे भी तेजी की संभावना:
विशेषज्ञ मानते हैं कि सप्लाई-डिमांड गैप और ग्रीन एनर्जी की डिमांड के चलते तांबे की कीमतें आगे भी मजबूत रह सकती हैं।









