Twisha Sharma Death Case : भोपाल में ट्रायल को लेकर CBI ने उठाए सवाल, दूसरे राज्य में सुनवाई की मांग
Twisha Sharma Death Case : नई दिल्ली। ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक बड़ा कानूनी अपडेट सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि भोपाल में इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई संभव नहीं है। जांच एजेंसी ने ट्विशा के पिता की याचिका का समर्थन करते हुए मुकदमे की सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है। सीबीआई का कहना है कि मामले की प्रमुख आरोपी और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह प्रभावशाली हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर ट्रायल प्रभावित होने और गवाहों को डराने-धमकाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।
CBI ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों उठाया निष्पक्ष सुनवाई का मुद्दा?
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी का न्यायिक क्षेत्र में प्रभावशाली पद पर रहना भी इस मामले में महत्वपूर्ण पहलू है।
सीबीआई ने आशंका जताई है कि स्थानीय स्तर पर मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा गवाहों पर दबाव बनाए जाने या उन्हें डराने-धमकाने की संभावना भी जताई गई है। इसी आधार पर एजेंसी ने ट्रायल को मध्य प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग का समर्थन किया है।
ट्विशा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई है याचिका
ट्विशा शर्मा के पिता ने मामले की सुनवाई भोपाल से बाहर किसी अन्य राज्य में कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका पक्ष है कि मौजूदा परिस्थितियों में भोपाल में निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।
इस याचिका में मुकदमे को दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। अब सीबीआई के समर्थन के बाद इस मांग को कानूनी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना है।
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह पर क्या है आरोप?
इस मामले में पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह प्रमुख आरोपी बताई गई हैं। सीबीआई ने अपने हलफनामे में उनके प्रभावशाली होने का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता जाहिर की है।
जांच एजेंसी का मानना है कि मामले में गवाहों की सुरक्षा और स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। हालांकि, अदालत में लगाए गए आरोपों और आशंकाओं पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।










