Land Registry Dispute : आदिवासी के नाम पर जमीन खरीदकर गैर-आदिवासी नहीं कर सकेंगे कब्जा, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

High Court

High Court

Land Registry Dispute : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर स्थित डिवीजन बेंच ने आदिवासी भूमि से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर किसी जमीन से जुड़े मामले की जांच नहीं रोकी जा सकती कि उसका रजिस्टर्ड बिक्री विलेख किसी आदिवासी व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि जमीन का वास्तविक कब्जा, उपयोग या नियंत्रण किसी गैर-आदिवासी व्यक्ति के पास है, तो राजस्व अधिकारी मामले की विस्तृत जांच कर सकते हैं।

केवल रजिस्ट्री के नाम से तय नहीं होगा वास्तविक मालिकाना कब्जा

हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया कि जमीन की रजिस्ट्री किसके नाम पर है, केवल इसी आधार पर पूरे मामले को समाप्त नहीं माना जा सकता। प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को यह देखने का अधिकार है कि जमीन पर वास्तविक रूप से कब्जा किसका है और उसका उपयोग कौन कर रहा है।

04 September 2026 Rashifal : भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आज, जानिए अपना राशिफल

यदि किसी आदिवासी व्यक्ति के नाम पर जमीन खरीदी या रजिस्टर्ड कराई गई है, लेकिन वास्तविक लाभ और नियंत्रण किसी गैर-आदिवासी के पास है, तो इस तरह के मामले की जांच की जा सकती है।

गैर-आदिवासी के वास्तविक कब्जे की होगी जांच

अदालत के फैसले के बाद अब ऐसे मामलों में जमीन के वास्तविक उपयोग और कब्जे को महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। राजस्व अधिकारी यह जांच कर सकेंगे कि जमीन पर खेती कौन कर रहा है, उसका आर्थिक लाभ किसे मिल रहा है और संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण किस व्यक्ति का है।

कोर्ट ने संकेत दिया कि कानून के प्रावधानों को केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर दरकिनार नहीं किया जा सकता। यदि किसी व्यवस्था के जरिए आदिवासी भूमि पर अप्रत्यक्ष रूप से गैर-आदिवासी का कब्जा स्थापित करने का प्रयास किया गया है, तो उसकी जांच आवश्यक होगी।

आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिहाज से अहम फैसला

छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति समुदाय की भूमि विशेष कानूनी प्रावधानों के तहत संरक्षित है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला आदिवासी भूमि के संरक्षण के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस निर्णय से उन मामलों में कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है, जहां कागजों में जमीन किसी आदिवासी व्यक्ति के नाम पर दर्ज हो, लेकिन वास्तविक रूप से उसका उपयोग और नियंत्रण किसी अन्य व्यक्ति के हाथों में हो।

About The Author