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CG Liquor Scam : शराब घोटाले में जांच का दायरा बढ़ा, भिलाई में EOW की छापेमारी से मचा हड़कंप

CG Liquor Scam : भिलाई। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को EOW की टीम ने भिलाई के नेहरू नगर स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट अजय सोमानी और प्रदीप पाल के कार्यालयों पर छापेमारी की। दोनों पीएसएसी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर बताए जा रहे हैं और उनका नाम एनवी डिस्टलरी के ऑडिट से जुड़ा होने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी अपने कब्जे में लिए हैं।

सुबह से चली तलाशी कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, EOW की टीम शनिवार सुबह भिलाई के नेहरू नगर स्थित कार्यालय पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों, कंप्यूटर सिस्टम, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की। कई घंटों तक चली इस कार्रवाई के दौरान ऑडिट और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई।

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बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने कई फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी अब फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जाएगी।

एनवी डिस्टलरी के ऑडिट से जुड़ा मामला

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट एनवी डिस्टलरी के ऑडिट कार्य से जुड़े रहे हैं। इसी कड़ी में EOW यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता या संदिग्ध लेनदेन का कोई संबंध शराब घोटाले से है या नहीं।

जांच एजेंसी ऑडिट से जुड़े दस्तावेजों का मिलान पहले से उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के साथ करेगी।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की होगी जांच

छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इन डिवाइसों से ई-मेल, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगी।

शराब घोटाले की जांच लगातार जारी

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में EOW और अन्य जांच एजेंसियां लगातार अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। अब तक इस मामले में कई स्थानों पर छापेमारी, दस्तावेजों की जब्ती और विभिन्न लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और एजेंसियां वित्तीय लेनदेन से जुड़े हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।

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