पूर्व पार्षद पर पुलिस कार्रवाई से बचाने के नाम पर ₹1.20 लाख की ठगी का आरोप, एसपी से शिकायत
कोरबा। कोरबा जिले के सुराकछार बस्ती, थाना बांकीमोंगरा निवासी सुरेश चंद ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर नेहरू नगर कटघोरा के पूर्व पार्षद रविन्द्र मोहन बघेल पर पुलिस कार्रवाई से बचाने के नाम पर ₹1.20 लाख की ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच कर अपराध दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत के अनुसार, सुरेश चंद के पुत्र साहिल कुमार के विरुद्ध एक युवती द्वारा थाना बांकीमोंगरा में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी दौरान रविन्द्र मोहन बघेल ने स्वयं को प्रभावशाली बताते हुए दावा किया कि उनकी पुलिस अधिकारियों तक पहुंच है और यदि ₹1.50 लाख दिए जाएं तो साहिल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी।

आवेदक का आरोप है कि बघेल के कहने पर 15 मई 2026 को ₹50,000 ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए तथा 16 मई 2026 को ₹1 लाख नकद उनके बताए व्यक्ति को सौंपे गए। इसके बावजूद 17 मई 2026 को पुलिस ने साहिल कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
शिकायत में कहा गया है कि गिरफ्तारी के बाद जब रकम वापस मांगी गई तो आरोपित ने ₹30,000 लौटाए, लेकिन शेष ₹1.20 लाख लौटाने से इनकार कर दिया। आवेदक का कहना है कि अब आरोपित कथित रूप से “जो करना है कर लो” कहकर रकम वापस देने से मना कर रहा है।
सुरेश चंद ने अपनी शिकायत के साथ बातचीत की ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग एवं पेन ड्राइव भी साक्ष्य के रूप में संलग्न करने का दावा किया है। शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस महानिरीक्षक (बिलासपुर रेंज) एवं थाना प्रभारी, बांकीमोंगरा को भी भेजी गई है।
फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सूत्रों का दावा है कि थाना बांकीमोंगरा में लंबे समय से दलालों की सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार एक रिक्शा चालक पिछले कई वर्षों से थाना परिसर में साफ-सफाई का कार्य करने की आड़ में सक्रिय है और कथित रूप से हाट-बाजार, ऑटो एवं बस स्टैंड से वसूली सहित पुलिसकर्मियों की निजी अवैध वसूली का माध्यम भी बना हुआ है, ताकि संबंधित लोगों के हाथ सीधे तौर पर लाल न हों। उल्लेखनीय है कि पूर्व में थाना बांकीमोंगरा के दो सहायक उप निरीक्षकों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बाद से कथित तौर पर निजी व्यक्तियों के माध्यम से कार्य कराए जाने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।









