कोरबा में भू-विस्थापितों का हल्ला बोल, रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर SECL का घेराव

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एसईसीएल मानिकपुर क्षेत्र के खदान विस्तार से प्रभावित ग्रामीणों ने सोमवार को रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम भू-विस्थापित समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मानिकपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक (जीएम) को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे एसईसीएल प्रबंधक कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

10 गांवों के भू-विस्थापित आंदोलन में शामिल

प्रदर्शन में मिलाई खुर्द क्रमांक-1, 2, 3, रापाघर्रा, कुदारी खार, दादर खुर्द, डेलवाडीह, बरसपुर, करनारा और कदमाहाबार गांवों के भू-विस्थापित ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान विस्तार और नाला डायवर्सन के लिए उनकी उपजाऊ एवं सिंचित जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया, लेकिन बदले में रोजगार और पुनर्वास का वादा आज तक पूरा नहीं किया गया।

जमीन चली गई, आजीविका का संकट

भू-विस्थापितों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद उनकी खेती खत्म हो गई और कई परिवारों के मकान भी प्रभावित हुए। आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं बचा है। इसके बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि रोजगार देने के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।

ज्ञापन में रखीं पांच प्रमुख मांगें

भू-विस्थापित समिति ने एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं—

  • प्रभावित गांवों के मूल निवासियों को सभी निजी ठेका कंपनियों में रोजगार में पहली प्राथमिकता दी जाए।
  • जमा किए गए रोजगार आवेदन पत्रों का जल्द निराकरण किया जाए।
  • भर्ती प्रक्रिया में दलाली और पैसों की मांग पर रोक लगाई जाए तथा भू-विस्थापित समिति की भागीदारी अनिवार्य की जाए।
  • अन्य राज्यों की तर्ज पर एसईसीएल की निजी ठेका कंपनियों में 90 प्रतिशत रोजगार स्थानीय भू-विस्थापितों को दिया जाए।
  • सभी निजी ठेका कंपनियों और भू-विस्थापित समिति की संयुक्त बैठक कर भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

मांगें नहीं मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। भू-विस्थापितों का कहना है कि वर्षों से रोजगार और पुनर्वास के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन अब वे अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

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