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CG High Court : ‘दिल्ली जैसी हवा नहीं चाहिए’, हाईकोर्ट ने आरा मिलों पर लगी रोक हटाने से किया इनकार

CG High Court : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय को सही ठहराया है, जिसके तहत अधिसूचित जंगलों और संरक्षित वन क्षेत्रों से हवाई दूरी के 10 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस दायरे में संचालित आरा मिलों को अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मामले में दायर 19 याचिकाओं को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश को “दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए” और पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे को बफर जोन मानते हुए वहां आरा मिलों के संचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था।

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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार के निर्णय को वैध और जनहित में बताया। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए इस प्रकार के प्रतिबंध आवश्यक हैं।

19 याचिकाएं खारिज, आरा मिलों को नहीं मिली राहत

इस मामले में विभिन्न आरा मिल संचालकों और अन्य पक्षों की ओर से कुल 19 याचिकाएं दायर की गई थीं। सभी याचिकाओं में सरकार के आदेश को निरस्त करने और प्रतिबंध हटाने की मांग की गई थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में आरा मिलों का संचालन अनुमति योग्य नहीं होगा। अदालत के इस फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों में संचालित आरा मिलों पर रोक बरकरार रहेगी।

‘दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए’

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि विकास और व्यापार जरूरी हैं, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। अदालत ने कहा कि देश के कई बड़े शहर गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं और ऐसी स्थिति से बचने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।

इसी संदर्भ में अदालत ने टिप्पणी की कि “हमें दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए।” न्यायालय ने माना कि वन क्षेत्रों के आसपास बफर जोन बनाए रखना पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।

वन संरक्षण और पर्यावरण को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला वन संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। जंगलों के आसपास अनियंत्रित औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण से वन संपदा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में मदद मिलेगी।

साथ ही यह फैसला भविष्य में पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण माना जा रहा है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार की बफर जोन नीति को कानूनी मजबूती मिल गई है। अब अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर की हवाई दूरी के भीतर नई आरा मिलों के संचालन या अनुमति को लेकर सरकार की नीति प्रभावी रहेगी।

पर्यावरणविदों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। वहीं अब संबंधित विभागों पर इस आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी, ताकि वन क्षेत्रों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को मजबूती मिल सके।

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