14 साल पुराने फर्नीचर घोटाले की जांच फिर तेज, ACB ने शिक्षा मिशन कार्यालय में दी दबिश

अंबिकापुर। वर्ष 2011-12 में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत हुए करोड़ों रुपये के चर्चित फर्नीचर घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने बुधवार को राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय पहुंचकर घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी को लंबे समय से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। इसके चलते ACB की टीम ने सीधे कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल की। टीम हार्ड कॉपी रिकॉर्ड के साथ-साथ डिजिटल दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी गहन जांच कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में हुए इस कथित फर्नीचर घोटाले में विभाग के 6 से 7 अधिकारियों के नाम सामने आए थे। वहीं जांच के दौरान करीब 12 फर्मों की संलिप्तता भी उजागर हुई थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) एवं 13(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

ACB की इस कार्रवाई के बाद विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है। जांच एजेंसी दस्तावेजों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में शामिल अधिकारियों और संबंधित फर्मों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल ACB दस्तावेजों के सत्यापन और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में लगी हुई है।

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