भरत तिवारी का एनकाउंटर संदिग्ध, न्यायिक जांच कर सच्चाई उजागर की जाए – धनेश कुमार सिंह

बिहार में भरत तिवारी के पुलिस एनकाउंटर की घटना ने कानून व्यवस्था एवं मानवाधिकारों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। घटना की परिस्थितियों को देखते हुए यह मामला अत्यंत संदिग्ध प्रतीत होता है तथा इसकी निष्पक्ष न्यायिक जांच आवश्यक है।
वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने जारी बयान में कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। किसी भी आरोपी को न्यायालय में अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना उसकी मृत्यु होना अनेक कानूनी और संवैधानिक सवाल उत्पन्न करता है।
उन्होंने कहा कि यदि पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य थे तो भरत तिवारी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिक प्रक्रिया के अनुसार मुकदमा चलाया जाना चाहिए था। लोकतंत्र में न्यायालय ही दोष और दंड का निर्धारण करता है, न कि सड़क या मुठभेड़।
श्री सिंह ने मांग की कि मामले की उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। इससे जनता के समक्ष वास्तविक तथ्य आएंगे और किसी भी प्रकार की आशंका का निराकरण होगा।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि मुठभेड़ नियमों एवं कानून के अनुरूप नहीं थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। कानून के शासन में किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जा सकता।

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