Chhattisgarh High Court की सख्त टिप्पणी , देरी के लिए सरकार की दलीलों को कोर्ट ने माना अपर्याप्त
Chhattisgarh High Court
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सरकारी प्रक्रिया का बहाना नहीं चला
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। सिर्फ यह कहना कि फाइलें विभागों में घूमती रहीं, अदालत के सामने स्वीकार्य कारण नहीं बन सकता।
राज्य सरकार ने नारायणपुर नक्सल प्रकरण में आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल को चुनौती दी थी। लेकिन अपील तय समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं की गई। कोर्ट ने पाया कि 182 दिनों की देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण पेश नहीं किया गया। कोर्ट रूम में उस वक्त सन्नाटा छा गया जब खंडपीठ ने कहा कि कानून की समयसीमा का पालन सरकार पर भी उतना ही लागू होता है जितना आम नागरिक पर। सुनवाई के दौरान मौजूद अधिवक्ताओं के बीच इस टिप्पणी की काफी चर्चा रही।
क्या है पूरा मामला?
नारायणपुर जिले से जुड़े इस नक्सल प्रकरण में कुछ आरोपियों को जांच अवधि पूरी होने के बाद डिफॉल्ट बेल मिली थी। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देने का फैसला लिया, लेकिन कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। यही देरी अब सरकार पर भारी पड़ गई। अदालत ने देरी माफी आवेदन भी अस्वीकार कर दिया। इसके बाद अपील स्वतः निरस्त मानी गई। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में सरकारी विभागों के लिए बड़ा संदेश माना जाएगा।









