ऊर्जा नगरी कोरबा एयरपोर्ट से अब भी वंचित, कब पूरी होगी वर्षों पुरानी मांग?
कोरबा। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा नगरी के रूप में पहचान रखने वाला कोरबा आज भी एयरपोर्ट जैसी बुनियादी और अत्यंत आवश्यक सुविधा से वंचित है। वर्षों से एयरपोर्ट निर्माण को लेकर केवल कागजी कार्यवाही और घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है।
कोरबा जिले में देश के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान संचालित हैं—पावर प्लांट, कोयला खदानें, एल्युमिनियम उद्योग तथा बड़े कॉर्पोरेट समूह जैसे वेदांता और अदाणी यहां कार्यरत हैं। इसके बावजूद, यहां एयर कनेक्टिविटी का अभाव विकास की गति को प्रभावित कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों और उद्योग जगत का मानना है कि जिस स्तर की औद्योगिक गतिविधियां कोरबा में हो रही हैं, उस हिसाब से यहां एयरपोर्ट की आवश्यकता और भी अधिक है। वर्तमान में व्यवसाय, चिकित्सा, शिक्षा और आपातकालीन कारणों से लोगों को लंबी दूरी तय कर अन्य शहरों के एयरपोर्ट का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होती है।
विडंबना यह है कि वर्षों से यह मुद्दा उठता तो रहा है, लेकिन इसे लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। आज आवश्यकता है कि सभी जनप्रतिनिधि, व्यापारिक संगठन, चेंबर ऑफ कॉमर्स, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक एकजुट होकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे को राज्य और केंद्र सरकार तक प्रभावी रूप से पहुंचाएं।
रोटरी क्लब कोरबा के अध्यक्ष नितिन चतुर्वेदी ने भी इस ज्वलंत मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कोरबा के आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए केंद्र शासन तक शीघ्र पहुंचाया जाए, ताकि कोरबा को एयरपोर्ट जैसी अत्यावश्यक सुविधा मिल सके और क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्राप्त हो।
कोरबा के नागरिकों की यह स्पष्ट मांग है कि एयरपोर्ट निर्माण को प्राथमिकता में शामिल किया जाए और शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
यदि कोरबा जैसे औद्योगिक जिले को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा जाता है, तो न केवल उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
अब समय आ गया है कि कोरबा को उसका अधिकार मिले और एयरपोर्ट निर्माण की वर्षों पुरानी मांग को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।















