Vedanta Plant Accident : हादसे में अनाथ हुए बच्चों की 12वीं तक की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगा वेदांत समूह

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धुएं, सन्नाटे और टूटे परिवारों की कहानी

प्लांट के भीतर उस दिन सब कुछ सामान्य नहीं था। अचानक अफरा-तफरी मची। मशीनों की आवाज के बीच चीखें गूंज उठीं। कुछ ही मिनटों में हालात बदल गए। कंपनी के मुताबिक, इस हादसे में 25 श्रमिकों की जान गई। कई परिवारों के चूल्हे एक झटके में बुझ गए। गांवों में सन्नाटा है—हर घर में मातम।मैंने एक स्थानीय कर्मचारी से बात की। उसकी आवाज कांप रही थी—“हमने साथ काम किया… अब नाम सुनते हैं तो यकीन नहीं होता कि वो नहीं रहे।”

चेयरमैन का दर्द: निजी और सार्वजनिक दोनों

 पर लिखा कि इस साल की शुरुआत में उन्होंने अपने बेटे को खोया। और अब यह हादसा। शब्द छोटे पड़ गए, दर्द बड़ा हो गया। उनका संदेश साफ था—यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, यह इंसान थे। परिवार थे। सपने थे। दोनों ही हादसे, इतने unnatural से, पीड़ा से भरे लगते हैं, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।मुझे दुख और हैरत होती है सोचकर कि हमारे इस Athena plant में हमने सर्वोच्च सावधानी बरती, इस plant की पूरी जिम्मेदारी भी हमने Hindustan की सबसे भरोसेमंद महारत्न company NTPC-GE की partnership NGSL को सौंपी। Contractors और Employees भी उनके थे। Expertise भी उनका था। और इसी भरोसे पे निश्चिंत होकर हमने इस plant का रखरखाव और operations, outsource किया था। फिर भी यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया।

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