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CG BREAKING : कोयला लेवी केस में बढ़ी सख्ती’ हाईकोर्ट के फैसले के बाद रानू साहू की मुश्किलें और गहरी

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहीं निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू को हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रानू साहू और उनके परिजनों द्वारा दायर 9 अपीलों को एक साथ खारिज कर दिया है।

क्या है हाईकोर्ट का निर्णय?

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय के पास व्यापक अधिकार हैं। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि:

  • यदि अपराध से सीधे तौर पर अर्जित (Proceeds of Crime) की गई संपत्ति का पता नहीं चल पाता है, तो प्रवर्तन निदेशालय आरोपी की किसी अन्य वैध संपत्ति को भी उसके ‘समान मूल्य’ (Equivalent Value) के बराबर कुर्क (Attach) कर सकता है।

  • हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिकाकर्ताओं की उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया, जिनमें संपत्ति की कुर्की को अनुचित बताया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला राज्य में हुए कथित कोयला लेवी और जिला खनिज निधि (DMF) घोटाले से जुड़ा है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान यह पाया था कि रानू साहू और उनके करीबियों ने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की है। इस जांच के दायरे में आने वाली उनकी करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों को ईडी ने कुर्क किया था, जिसे रानू साहू और उनके परिजनों ने कोर्ट में चुनौती दी थी।

ED की कार्रवाई और कानूनी स्थिति

जांच एजेंसी ने पूर्व में अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस घोटाले में भारी मात्रा में धन का हेरफेर हुआ। ईडी ने तर्क दिया था कि चूँकि अपराध से प्राप्त धन का निवेश अन्य संपत्तियों में किया गया है, इसलिए कानून की धारा 5 (PMLA) के तहत ‘समान मूल्य’ की संपत्तियों को जब्त करना वैधानिक है।

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