CG POLITICS: ‘बचपन की टिकट’ या सियासी टिकट की तैयारी? कोरबा में सरोज पांडेय के आयोजन से BJP में हलचल तेज
कोरबा, 13 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों कोरबा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह है पूर्व सांसद और बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का ‘बचपन की टिकट’ नाम से आयोजित कार्यक्रम, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। भले ही इस आयोजन को सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बताया गया हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायनों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है।
गैर-राजनीतिक मंच पर सियासी रंग
कोरबा के अशोक वाटिका में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों महिलाओं और स्कूली छात्राओं की भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों से सजा यह आयोजन देखने में सामाजिक जरूर था, लेकिन मंच और मैदान दोनों पर राजनीति की गूंज साफ सुनाई दी।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री लखनलाल देवांगन की मौजूदगी, कोरबा और बिलासपुर की महापौरों की सक्रियता और बीजेपी संगठन के पदाधिकारियों की बड़ी भागीदारी ने इसे पूरी तरह सियासी रंग दे दिया।
जनसंपर्क या चुनावी रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह आयोजन एक मजबूत जनसंपर्क अभियान की तरह नजर आया। जिस तरह से व्यापक स्तर पर महिलाओं को जोड़ा गया और कार्यक्रम को बड़े स्तर पर सफल बनाया गया, उसने इसे सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन से कहीं ज्यादा बना दिया।
अब सवाल उठ रहा है—
क्या यह सिर्फ ‘बचपन’ की यादों को ताजा करने का प्रयास था, या फिर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने की रणनीति?
BJP के अंदर बढ़ी बेचैनी
इस आयोजन के बाद बीजेपी के अंदर ही हलचल तेज हो गई है। खासकर उन नेताओं के बीच, जो आगामी चुनावों में टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं। ‘बचपन की टिकट’ नाम भले ही मासूमियत दर्शाता हो, लेकिन इसके पीछे छिपे सियासी संदेश ने कई संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर यह संदेश साफ गया है कि चुनावी दौड़ अब शुरू हो चुकी है और जो नेता अभी से जनता के बीच सक्रिय रहेंगे, वही आगे टिकट की दौड़ में मजबूत स्थिति बना पाएंगे।















