CRPF Operation Chhattisgarh : सुरक्षाबलों की बड़ी जीत , जंगलों से बरामद हुआ बारूद का जखीरा, नक्सलियों की खौफनाक साजिश नाकाम

CRPF Operation Chhattisgarh

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जंगल के भीतर छिपा था खतरनाक जखीरा

ऑपरेशन आसान नहीं था। घना जंगल। सीमावर्ती इलाका। हर कदम पर खतरा। CRPF की टीम ने खुफिया इनपुट के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कुछ घंटों की गहन तलाशी के बाद जवानों को जमीन के नीचे छिपाया गया विस्फोटक सामग्री का जखीरा मिला। सूत्र बताते हैं कि यह सामग्री IED निर्माण और बड़े हमले के लिए इस्तेमाल की जा सकती थी। अगर यह समय पर नहीं मिलती, तो नुकसान बड़ा होता। बहुत बड़ा। जवानों ने इलाके को तुरंत घेर लिया। बम डिस्पोजल टीम को बुलाया गया। हर कदम सावधानी से उठाया गया — एक गलती, और पूरा ऑपरेशन खतरे में पड़ सकता था।

ऑपरेशन का दबाव और ज़मीन की सच्चाई

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह इलाका लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का हॉटस्पॉट रहा है। सोनाबेड़ा के जंगल सिर्फ हरियाली नहीं हैं — ये रणनीतिक छिपने की जगह भी हैं। एक अधिकारी ने बताया, जवानों ने लगातार कई घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया। थकान दिखी, लेकिन रफ्तार नहीं टूटी। आप महसूस कर सकते थे — हवा में तनाव था। हर आवाज पर नजर। हर झाड़ी संदिग्ध।

“हमारे लिए ये सिर्फ ऑपरेशन नहीं था। ये लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी थी। हमने वो किया जो जरूरी था।” — CRPF अधिकारी, ऑपरेशन टीम

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह विस्फोटक सुरक्षाबलों या सड़क निर्माण परियोजनाओं को निशाना बनाने के लिए रखा गया था। इस बरामदगी के बाद इलाके में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अब अगला कदम साफ है — इंटेलिजेंस बढ़ेगी। कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज होंगे। और सीमा क्षेत्र में निगरानी और कड़ी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की रिकवरी न सिर्फ एक साजिश को रोकती है, बल्कि नक्सलियों की सप्लाई चेन और मूवमेंट पैटर्न को भी उजागर करती है।

मैदान से एक झलक

एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया, “सुबह से ही जंगल में हलचल थी। हेलीकॉप्टर की आवाजें भी सुनी गईं।” गांव के लोग दूरी बनाकर खड़े रहे। डर था, लेकिन भरोसा भी — कि जवान स्थिति संभाल लेंगे। ऐसे ऑपरेशन सिर्फ खबर नहीं होते। ये जमीन पर लड़ी जा रही एक लंबी लड़ाई का हिस्सा होते हैं।

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