नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023: महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
सरोज पांडेय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर चर्चा करते हुए इसे देश के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से महिला आरक्षण को लेकर देश में चर्चा होती रही, लेकिन हर बार यह विषय राजनीतिक खींचतान में उलझकर रह जाता था। कई राजनीतिक दलों ने महिलाओं को केवल एक वोटर के रूप में देखा, जबकि नेतृत्व और चुनावी भागीदारी में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
उन्होंने बताया कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पहले से रही है, लेकिन चुनावी मैदान में उनकी संख्या बेहद कम रही। जो महिलाएं चुनाव लड़ती भी थीं, उन्हें कई बार हार का सामना करना पड़ता था। ऐसे में आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को आगे लाने का यह प्रयास सराहनीय है।
देश के प्रधानमंत्री द्वारा इस विधेयक को दोनों सदनों में पारित कराकर महिलाओं के लिए नई दिशा तय की गई है। उन्होंने उल्लेख किया कि विशेष प्रावधान के तहत संसद का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें इस महत्वपूर्ण संशोधन का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस कानून के लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जो 2029 से प्रभावी होने की संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले सरकार ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान चलाकर समाज में जागरूकता बढ़ाने का काम किया। एक समय था जब बेटियों के जन्म पर उन्हें मार दिया जाता था, जिससे लिंगानुपात में भारी गिरावट आई थी। लेकिन इन अभियानों के कारण आज स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है और महिलाओं की भागीदारी समाज में बढ़ी है।
अंत में राजेश वीजा ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम देश में महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।















