Central Govt Sabarimala Stand : बड़ी खबर , सबरीमाला मंदिर के रीति-रिवाजों पर केंद्र का रुख साफ, सुप्रीम कोर्ट में परंपराओं का बचाव
- बड़ा स्टैंड: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि मंदिर के नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
- मुख्य दलील: पूजा स्थल का प्रवेश नियम देवता के स्वरूप और सदियों पुरानी परंपराओं का मामला है।
- अगला कदम: सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ अब केंद्र की दलीलों और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन पर करेगी विचार।
Central Govt Sabarimala Stand , नई दिल्ली — केरल के विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रही कानूनी जंग में केंद्र सरकार ने आज अपना रुख साफ कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को दाखिल अपने पक्ष में केंद्र ने कहा कि यह मामला “लिंग आधारित भेदभाव” (Gender Discrimination) का नहीं है। सरकार ने दलील दी कि मंदिर में प्रवेश के नियम पूरी तरह से देवता के विशेष स्वरूप और सदियों से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं पर टिके हैं।
परंपरा बनाम अधिकार: सुप्रीम कोर्ट में ‘पावर प्ले’
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि धार्मिक रीति-रिवाजों को केवल आधुनिक नजरिए से देखना सही नहीं होगा। सरकार के मुताबिक, देवता की ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ स्वरूप वाली मान्यता ही उन नियमों का आधार है, जो कुछ आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को रोकते हैं। यह दलील तब आई है जब याचिकाकर्ताओं ने इसे मौलिक अधिकारों और समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया था।
“पूजा की जगह में कौन प्रवेश कर सकता है, यह केवल लिंग का मामला नहीं है। यह धार्मिक रीति-रिवाजों, पुरानी मान्यताओं और देवता के खास स्वरूप पर आधारित एक व्यवस्था है।” — केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दलील















