Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में आज से ‘धार्मिक आजादी’ बनाम ‘नारी शक्ति’ की सबसे बड़ी कानूनी जिरह

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  • बड़ी सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट आज महिलाओं के अधिकारों से जुड़े चार प्रमुख मामलों पर एक साथ जिरह करेगा।
  • मुख्य मुद्दे: मुस्लिम समुदाय में खतना की प्रथा, मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश और सबरीमाला मंदिर में एंट्री पर होगा फैसला।
  • पारसी महिलाओं का हक: गैर-धर्म में शादी करने वाली पारसी महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश की याचिका पर भी सुनवाई।

Supreme Court , नई दिल्ली — भारत की सबसे बड़ी अदालत आज किसी ‘ग्रैंड फिनाले’ की मेजबानी करने जा रही है। देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के धार्मिक और व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट के ‘पिच’ पर तीखी बहस होने वाली है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच आज उन याचिकाओं पर गौर करेगी जो दशकों पुरानी परंपराओं और आधुनिक अधिकारों के बीच के ‘टकराव’ को खत्म कर सकती हैं।

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मैदान पर चार बड़े ‘मुकाबले’: कौन मारेगा बाजी?

आज की सुनवाई किसी ‘क्वाड्रेंगुलर सीरीज’ से कम नहीं है, जहाँ हर मामला अपने आप में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कोर्ट रूम का स्कोरकार्ड आज इन चार मोर्चों पर तय होगा:

  • खतना बनाम अधिकार: मुस्लिम समुदाय (खासकर दाऊदी बोहरा) में महिलाओं के खतना की प्रथा को चुनौती दी गई है। इसे ‘अमानवीय’ और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
  • मस्जिद में एंट्री: क्या महिलाएं भी पुरुषों के साथ मस्जिद में नमाज अदा कर सकती हैं? कोर्ट इस पर अपनी ‘फाइनल कॉल’ देगा।
  • सबरीमाला का ‘रीप्ले’: सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दाखिल की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर आज जिरह होगी। यह मामला लंबे समय से कानूनी ‘डेडलॉक’ में फंसा है।
  • पारसी कम्युनिटी का ‘डिफेंस’: गैर-धर्म में शादी करने के बाद पारसी महिलाओं को उनके धार्मिक स्थलों (आतिश बेहराम) से बाहर रखने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आज की सुनवाई भारत के सामाजिक ढांचे के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित होगी। सबकी नजरें बेंच के उस फैसले पर टिकी हैं जो इन पारंपरिक रिवाजों की ‘फिल्डिंग’ को हमेशा के लिए बदल सकता है।

“यह केवल धार्मिक प्रथाओं का मामला नहीं है, बल्कि यह गरिमा और समानता के अधिकार का मुकाबला है। हम उम्मीद करते हैं कि कोर्ट आज महिलाओं के पक्ष में एक मजबूत ‘स्ट्राइक’ करेगा।”
— याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ वकील

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